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Thursday, December 19, 2024

मेरा भारत महान

अखंड भारत की बुलंद तस्वीर विभिन्न और विविध सभ्यता और संस्कृति का संगम है । सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा सिर्फ हिंदुस्तान नहीं बल्कि अपने आप में सारा जहां सारा जहान है । भारत की मिट्टी की यह खुशबू है कि दुनिया के अलग-अलग भागो से लोग खींचे चले आते हैं और/मगर फिर यहीं के होकर रह जाते हैं । इसका उदाहरण अनार्य की भूमि में आर्य का आना और बसना, इसी प्रकार कालांतर में सिकंदर, मुगल, अंग्रेजों आदि का आना और इसकी सभ्यता और संस्कृति का होना या फिर इसका मुरीद हो जाना है । वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से रचित और संचित इस भूमि की यही वैश्विक विशेषता है जिसमे समस्त विश्व को परिवार की तरह अपना बना लेने की अद्भुत क्षमता है और यही इसकी सभ्यता बनाम संस्कृति की अनोखी विलक्षण ताकत है ।

भौगोलिक स्तर पर भी भारत विभिन्न व विविध स्तर पर अनोखा है और तमाम तरह के प्राकृतिक सौंदर्य से सम्पूर्ण है । प्राकृतिक संपदा के मामले में भी यही भूमि विलक्षण है और इस भूमि का कोई भी क्षेत्र बंजर होकर भी बंजर नहीं है क्योंकि वह या तो भौगोलिक दृस्टिकोण से सुंदर है या फिर वह अन्य भौगोलिक संपदा नदी, जंगल, पहाड़, पठार, रेगिस्तान, खान आदि से परिपूर्ण है ।

पूरब में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर, उतर में हिमालय, दक्षिण में हिंद महासागर के रूप में इसके बाॅर्डर लाइन तक प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण और सम्पूर्ण हैं । कहने को तो भारत एक प्रायद्वीप है मगर इसकी समस्त दिशाएं राष्ट्र के सीमा से बाहर भी प्राकृतिक सौंदर्य से सम्पूर्ण हैं ।

भारत की सभ्यता और संस्कृति इतनी रोमांचक है कि इसके विभिन, विविध, विचित्र सौंदर्य से कोई भी अछूता नहीं रह सकता । मैदानी, रेगिस्तानी, पहाड़ी, बर्फीली, जंगली, नदी घाटी सभ्यता आदि ऐसे अप्रतिम विविध उदाहरण हैं जो हरेक में अपने आप में विविध संस्कृति को आत्मसात किए हैं । इतना ही नहीं यहां हर सभ्यता और संस्कृति व उसके अंदर विविध आचार-व्यवहार, भाषाओं के इतने रंग भरे हैं कि आप इसकी सार्वकालिक और सार्वभौमिक रंगीन पहचान और विरासत को इसी दश में महसूस कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि वसुधैव कुटुम्बकम का नारा यहां से विश्व के लिए यूं ही नहीं विश्वव्यापी हुआ।

भारत ऐसा दे सम्पूर्ण दुनिया में कहीं नहीं है । इसे सामान्य अर्थों में देखना, सुनना, समझना आदि शायद अतियोक्ति लगे मगर जब आप दुनिया के किसी भी दे का इतिहास और वर्तमान उठाकर देखेंगे तो पाएंगे कि सम्पूर्ण दुनिया में किसी भी देश में इतनी सम्पूर्ण विभिन्नता, विविधता, विचित्रता कहीं नहीं है । अगर वह किसी एक मामले में सम्पूर्ण है तो किसी दूसरे मामले में अपूर्ण है । इसे आप स्वयं ही स्वयं जज कर सकते हैं ।

भारत वास्तव में एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है जिसे एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है । इसे आप लोगो की कमअक्ली, अज्ञानता, अल्प ज्ञान, अधूरा ज्ञान आदि के अलावे वर्सों की गुलाम मानसिकता, विस्मृत अतीत आदि के साथ वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक आदि कारणों के कारण जान सकते हैं । अरसों की गुलाम मानसिकता के कारण भारत अपनी पंथनिरपेक्ष पहचान को भूल गया है और स्वार्थी, राजनीतिक आदि लोग अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए इसे धर्मनिरपेक्ष पहचान बता इसे जाति और धर्म के आधार पर बांटने का गंदा खेल खेलते हैं और खेल रहे हैं, इस कारण कुछ स्वार्थी तत्व हमारे अज्ञान का फायदा अपनी लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं । इस प्रकार यह पंथनिरपेक्ष राष्ट्र इस वक्त जनता की नजर में भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना है । आज हालात यह है कि लोग धर्मनिरपेक्ष का मतलब तो जानते हैं मगर पंथनिरपेक्ष का मतलब तक नहीं जानते । पंथ यानि जाति और धर्म से उपर कर्म आदि जीवन मूल्यों के आधार पर बगैर किसी भेद-भाव के तैयार की गई एक व्यवस्था जहां जाति और धर्म के नाम तक की कोई पहचान नहीं है । अलबत्ता बाद में इसमे पनपी वंशागत आदि कुरीति ने इसे धर्मनिरपेक्ष के बाद जाति और धर्मआधारगत बनाने में भी अपनी कोई कसर नहीं छोड़ी, यह भी उतना ही सच है । अलबत्ता इससे पंथनिरपेक्ष सता का महत्व कम नहीं हो जाता जो धर्मनिरपेक्ष से उपर है और धर्मनिरपेक्ष जाति और धर्म से उपर । क्योंकि कुरीति या कुव्यवस्था तो किसी भी व्यवस्था आदि को अपभ्रंषित करने में सक्षम है तो इसमे गलती व्यवस्था की नहीं बल्कि उनके संचालकों की होती है । क्योंकि कोई भी व्यवस्था अपने आप में जीवित वस्तु नहीं है, यह जीवित और चलित ही अपने संचालकों द्वारा होती है अलबत्ता व्यवस्था के अपने नियम और कानून होते हैं जिसके कारण व्यवस्था का अस्तित्व होता है और उसके पालन व संचालन के द्वारा संचालकोें का अस्तित्वहोता है । अगर वह संचालक अपने दायित्व का पालन नहीं करते और व्यवस्था के मूलभूत सिधांत से इतर अपने नियम और कानून थोप देते हैं तो वह व्यवस्था अपनी मूलभूत व्यवस्था नहीं रह जाती और अपभ्रंषित होने लगती है । इस प्रकार वह व्यवस्था के अस्तित्व को ही मिटा डाल वास्तव में व्यवस्था के संचालक न होकर उसके आत्महंता आत्मघाती रूप होते हैं जो ऐसे कई कालजयी व्यवस्था को बर्बाद करने में सक्षम होते हैं । ऐसे में हमे जरूरत होती है उस कालजयी व्यवस्था को याद रखने की और उन्हें भी याद रखने की जिन्होंने व्यवस्था का हुक्मराज होने की आड़ में व्यवस्था का ही खात्मा कर दिया । यह इतिहास के सबक ही कालांतर में व्यवस्था के पुनर्जन्म पुनर्व्यवस्था के समय चाहे वह व्यवस्था नए रूप या नए नाम के साथ ही क्यूँ न आए, सबल भविष्य का आधार होते हैं ।   

अलबत्ता हमारे संविधान में भारत को एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में ही इसे पूर्ण राष्ट्र का दर्जा दिया गया है और यह भारतीय संविधान के आरंभ में ही लिखा है ।

भारतवर्ष का बरसों का इतिहास केवल बरसों का नहीं बल्कि बरसों बरस का है । इसे एक आदिकालीन गौरवशाली सभ्यता और संस्कृति माना जाना है । श्रृषि-मुनियों की परंपरा का केंद्र-बिंदु तो आध्यात्म और योग का जन्मदाता और धनी राष्ट्र और भूमि भी माना जाता है इसे । एक प्रकार से यह राष्ट्र यह भूमि सिर्फ राष्ट्र और भूमि नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा है । यह विश्व इतिहास की अतिआदि एवं आदिकालीन धरोहर है तो वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा के चलते विश्व सभ्यता और संस्कृति को आत्मसात करने का अतिआदिकालीन आदिकालीन साक्ष्य और प्रमाण भी है ।

राज्य

बिहार 22.03.1912 & 1950

पश्चिम बंगाल 15.08.1947 & 1950

उड़ीसा 01.04.1936 & 1950

उतकला दिबस ( उड़ीसा )  Utakala dibasa 01.04.1936 

छत्तीसगढ़ 01.11.2000

झारखंड 15.11.2000

उतर प्रदेश 24.01.1950

उतराखंड 09.11.2000

मध्य प्रदेश 01.11.1956

पंजाब 01.11.1966

राजस्थान 30.03.1949 

महाराष्ट्र   01.05.1960

तमिलनाडु 01.11.1956

कर्नाटक ( as मैसूर) 01.11.1956

कर्नाटक (नाम)  1973

केरल 01.11.1956

आंध्र प्रदेश 01.11.1953

स्टेट ऑफ आसाम (आसाम) 26.01.1950

आसाम (नाम) : स्टेट ऑफ आसाम : विभाजन  : 21.01.1972

सिक्किम 16.05.1975

गुजरात 01.05.1960

जम्मू-कश्मीर 26-27.10.1947

अरूणाचल प्रदेश 20.02.1987  

लद्दाख 1959 (जम्मू-कश्मीर हिस्सा),

लद्दाख 31.10.2019 as केंद्रशासित+

नागालैंड 01.12.1963

हरियाणा 01.11.1966

हिमाचल प्रदेश 1971

त्रिपुरा  21.01.1972

मनीपुर  21.01.1972 

मेघालय 21.01.1972 

मिजोरम 20.02.1987

तेलंगाना 02.06.2014

केंद्रशासित राज्य

अंडमान निकोबार 01.11.1956

गोवा 30.05.1987

पांडिचेरी 01.11.1954

जम्मू-कश्मीर 05.08.2019 ( घोषित ) 31.10.2019 ( प्रभावी )

लद्दाख 05.08.2019 ( घोषित ) 31.10.2019 ( प्रभावी )

दमन व दीव 26.11.2019 ( घोषित ) 26.01.2020 ( प्रभावी )

अधिकृत क्षेत्र

पाक अधिकृत  कश्मीर 1948 शनि-शनि

चीन अधिकृत तिब्बत 1962 शनि-राहु

   आदि भारत के वर्तमान भारत से इतर वर्तमान राष्ट्र

बर्मा : म्यामांर 01.04.1937 भारत भूमि से स्वतंत्र गुलाम देश

बर्मा : म्यामांर 04.01.1948 एक स्वतंत्र राष्ट्र शनि-शनि

पाकिस्तान 14.08.1947

अफगानिस्तान 19.08.1919

तिब्बत 1962 शनि-राहु

प्रमुख घटनाएँ

19.01.1990: कश्मीर पंडितों का कश्मीर से विस्थापन शुक्र- शुक्र

26.11.2008: बंबई गेटवे आफ इंडिया होटल पर हमला शुक्र-केतु

भारत विलय

भारत विलय: जम्मू- कश्मीर 26.10.1947 हस्ताक्षर

27.10.1947 से प्रभावी

भारत विलय: अंडमान निकोबार 01.11.1956

गोवा पुर्तगाली शासनकाल: 1510 - 19.12.1961 

भारत विलय: सिक्किम 16.05.1975

भारत विलय: पांडिचेरी 01.11.1954

भारत बनाम युद्ध

युद्ध वर्ष शा-अंतर्दशा

पाकिस्तान 1 : 26-27.10.1947 कश्मीर विजय : नि-नि 

गोवा 19.12.1961 8.30 गोवा  विजय : नि-राहु

दमन 19.12.1961 दमन विजय : नि-राहु

दीव 19.12.1961 दीव विजय : नि-राहु

चीन हमला 1962 भारत विभाजन:  नि-राहु

तिब्बत 1962 तिब्बत गुलाम : नि-राहु

लद्दाख 1962 लद्दाख विलय : नि-राहु

पाकिस्तान : युद्ध : 1965 : अप्रैल -सितम्बर : भारत विजय : शनि-वृहस्पति से बुध-बुध्

पाकिस्तान : युद्ध : 26.03.1971 बांग्लादेश की मांग शुरु : बुद्ध-शुक्रौ

देश : युद्ध : 16.12.1971 पाकिस्तान पर जीत : बुद्ध-सूर्य

बांग्लादेश : वर्तमान 16.12.1972 बांग्लादश निर्माण बुध-चंद्र

पाकिस्तान 4 युद्ध : 1989 पाक अधिकृत कश्मीर/कश्मीरी पंडित विस्थापन केतु-बुध

पाकिस्तान 5 युद्ध : 1999 मई -जुलाई कारगिल विजय शुक्र- राहु/वृहस्पति

मुख्य घटना : राष्ट्र 

महात्मा गांधी मृत्यु: हत्या 30.01.1948 शनि-शनि

लालबहादुर शास्त्री मृत्यु ( संदेहास्पद ) 11.11.1966 बुद्ध-बुद्ध

इंदिरा गांधी मृत्यु: हत्या 31.10.1984 केतु-चंद्र/मंगल

राजीव गांधी मृत्यु : 21.05.1991 शुक्र-शुक्र

संजय गांधी मृत्यु: दुर्घटना ( संदेहास्पद ) 23.06.1980 बुद्ध-शनि

 सुभाषचंद्र बोस मृत्यु ( संदेहास्पद ) 18.08.1945/1986 केतु-राहु/वृहस्पति

                                                                            समूह

हिंदू-मुस्लिम दंगा 1947 शनि-शनि

हिंदू-सिक्ख दंगा 1984 केतु- चंद्र/मंगल

बम्बई बम विस्फोट कांड : द. -प. भारत 12.03.1993

बाबरी मस्जिद कांड : मध्य : 06.12.1992

गोधरा कांड : पश्चिम : 27.02.2002

कश्मीर: कश्मीरी हिंदू पलायन : उत्तर-पश्चिम : 1991

मुंबई हमला : दक्षिण-पश्चिम : 26.11.2008

भारत बनाम युद्ध

पाकिस्तान हमला 1947 कश्मीर विजय नि-नि

चीन हमला 1962 भारत विभाजन नि-राहु/वृहस्पति

तिब्बत 1962 तिब्बत गुलाम नि-राहु/वृहस्पति

पाकिस्तान हमला 1971 पाकिस्तान विभाजन बुध-सूर्य

बांग्लादेश 1972 बांग्लादेश निर्माण बुध-सूर्य

पाकिस्तान हमला 1989 पाक अधिकृत कश्मीर केतु-बुध

पाकिस्तान हमला 1999 कारगिल विजय   शुक्र-राहु

भारत बनाम युद्ध

पाकिस्तान हमला 1947 कश्मीर विजय : नि-नि

चीन हमला1962 भारत विभाजन : नि-राहु

तिब्बत 1962 तिब्बत गुलाम : नि-राहु

पाकिस्तान हमला 1972 पाकिस्तान विभाजन : बुध-सूर्य/चंद्र

बांग्लादेश 1972 बांग्लादेश निर्माण :ः बुध- सूर्य/चंद

पाकिस्तान हमला 1989 पाक अधिकृत कश्मीर : केतु-बु/ शुक्र-शुक्र

पाकिस्तान हमला 1999 कारगिल विजय : शुक्र-राहु/वृह.


भारत और जम्मू-कश्मीर

  भारत की आजादी के समय में भारत के जन्म से पहले पाकिस्तान का जन्म हुआ जबकि भूखंड एक ही था । भारत की आजादी के साथ अभिन्न जम्मू-कश्मीर उस अखंड भूखंड का हिस्सा भारत को मिला जो भारत गुलाम भारत से आजाद भारत के रूप में साथ आजाद हुआ । अपितु जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक दस्तावेज व स्वतंत्रता आदि का काल 27 अक्टूबर 1947 है । यद्यपि राजा हरिसिंह ने 26 तारीख को दस्तखत कर दिए थे फिर भी यह 27 तारीख से प्रभावी (इफेक्टेड) हुआ था । इस प्रकार दोनो तिथि की  महत्ता है । आरंभिक तिथि चंूकि 8 मूलांक है इसलिए यह भारत के फेवर में है जबकि इसका इफेक्टेड होना 9 मूलांक है इसलिए इस सत्ता को लेकर शासकीय समस्या बनी रहेगी ।

  भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसकी राशि कर्क है जबकि जम्मू-कश्मीर का जन्म कर्क लग्न और मीन राशि में हुआ है । कर्क लग्न चूँकि भारत का तृतीय भाव है अतः भारत की भूमि का व्यय स्थान होने के कारण भूमि का यह क्षेत्र बनाम भूखंड भारत के लिए आरंभ से ही परेशानियों का सबब बना है । इसके अतिरिक्त भारत का जन्म मूलांक 6 है जबकि कश्मीर का जन्म मूलांक 9 है जो कि दोनो परस्पर एक-दूसरे के शत्रु हैं । इसके अलावे भारत का संविधान सह गणतंत्र दिवस 26 जनवरी होने के कारण मूलांक 8 है यह भी कश्मीर के जन्म मूलांक का शत्रु है अपितु दोनो अंकों में परस्पर शत्रुता है । ऐसे में भारत का इस भूखंड को लेकर समस्याग्रस्त होना भौगोलिक, सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक आदि स्तर पर स्पष्ट रूप से स्पष्ट होता है ।

  जम्मू-कश्मीर की जन्मकुंडली में लग्न में मंगल व नि का होना जो कि यूं भी शुभ नहीं माना जाता क्योंकि दोनो ग्रहों में परस्पर सौम्यता नहीं है, उसपर भी नीच के मंगल के साथ त्रुगत नि का होना इसका और भी उग्र व विवादित होना स्पष्ट करता है । कश्मीर की कुंडली कर्क लग्न और मीन राशि की है । लग्नेश चन्द्र मीन राशि में नवम में स्थित हैं यद्यपि भाव में अष्टम में है और चंद्र राशीश वृहस्पति वृश्चिक में पंचम में यद्यपि भाव में चतुर्थ में है । कर्क लग्नस्थ मंगल और नि लग्न व भाव दोनो के अनुसार लग्न में हैं । सूर्य, शुक्र और बुध तुला में हैं जबकि वृहस्पति, केतु वृश्चिक में हैं व राहु वृष में हैं यद्यपि भाव में वृहस्पति, केतु चतुर्थ और राहु दम में हैं । कर्क लग्न में नीच के मंगल और मारकेश नि का परस्पर त्रु ग्रह के रूप में लग्न व भाव लग्न दोनो के अनुसार ही लग्न में होना इसके हमेशा बाधाग्रस्त रहने का सूचक है । मंगल के कारण स्थिति उग्र तथापि नि के कारण रणनीतिक व कूटनीतिक भी होगी । लग्नेश का अष्टम मृत्यु भाव में होना भी इसके लिए शुभ नहीं हैं । शायद यही कारण है कि कश्मीर का एक हिस्सा विखंडित हो पाक के कब्जे में भी है जिसे हम पाक अधिकृत कश्मीर के रूप में जानते हैं ।

BHAARAT

भारत

आदि भारत

भारत क्या है ? एक राष्ट्र ! एक भूखंड ! एक जनसता ! एक सभ्यता ! एक संस्कृति ! यह सबकुछ है । भारत ! भरत का भारत ! आर्यावर्त ! आर्य का आर्यावर्त ! सिंधु का सिंधुस्तान बनाम हिंदू का हिंदुस्तान ! भारत बनाम इंडिया !

आदि भारत निःसंदेह आर्यों का आर्यावर्त बनाम भरत के भारत को माना जा सकता है । क्योंकि भारत के सर्वप्रथम मूल निवासी अनार्य जो कि सम्पूर्ण भारत में फैले थे कालांतर में अधिकांश दक्षिण भारत में बस गए और मध्य-पूर्व एशिया से आए आर्य उत्तर भारत में आए तथा भरत के नाम पर भारत राष्ट्र का नामकरण हुआ । उस वक्त भी भारत की कुंडली हस्तिनापुर बनाम आज की पुरानी दिल्ली थी । महाभारत काल के अनुसार गांधारी अफगानिस्तान के कांधार से थी, इस प्रकार भारत का अफगानिस्तान से तात्कालिक जुड़ाव भी  स्पष्ट होता है । यद्यपि आदि भारत की कोई प्रामाणिक् कुंडली उपलब्ध नहीं है, फिर भी कहा जाता है कि भारत की आदि राशि मकर है ।

आदि भारत : नवयुग

अपितु सम्राट अशोक का काल जबतक था तबतक आदि भारत की विशालतम तस्वीर लगभग यही नजर आती है । यद्यपि अलग-अलग काल में कई बार इसका विखंडन व योग होता रहा है और इसके बावजूद सम्राट अशोक काल तक यह अपने आदिकालीन रूप में मौजूद रही या पुनर््थापित हुई । सम्राट अशोक के काल तक बर्मा से अफगानिस्तान तक भारत की तस्वीर स्पष्ट नजर आती है । इस काल में भारत की राजधानी का केंद्र मगध साम्राज्य का केंद्र राजगृह वर्तमान राजगीर से बदलकर तात्कालिक कुसुमपुर बनाम पाटलिपुत्र बनाम आज का पटना : बिहार अवश्य बना । वर्तमानकाल के सबसे पुरातन काल जिसमे भारत अपने विशालतम रूप में था अशोक काल ही था । इस काल में बर्मा और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्र भारत का हिस्सा थे । इस भारत की कुंडली मौजूद नहीं है ।

आदि भारत : विखंडन और दासता

उसके बाद भारत का विखंडन और दासता का दौर शुरू हुआ ।अशोक काल के बाद के राष्ट्र के संचालक अक्षम थे, विदेसी आक्रमण व अन्यान्य कारण से राष्ट्र विखंडन व दासता का दौर शुरू हुआ जिसमे मुगल दौर व अंग्रेजी दौर का आगमन हुआ । अंग्रेजी दौर में कलकता को भारत की राजधानी होने का गौरव अवश्य प्रदान हुआ । इस भारत की कुंडली भी मौजूद नहीं है ।

सम्पूर्ण भारत

सम्पूर्ण भारत का साम्राज्य तिब्बत के पठार से अफगानिस्तान के सम्पूर्ण क्षेत्र सह सिंधु घाटी सभ्यता क्षेत्र सह बर्मा के साथ वर्तमान सम्पूर्ण भारत तक आता है । अलबत्ता यह अलग बात है कि आज के दौर में इनमे से कई भूखंड विखंडित, दासता या स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हैं ।

आदि भारत : सारां

भारत का भूखंड आजादी से पूर्व आज का बर्मा, बांग्लादे, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत यह सभी भारत का हिस्सा ही तो थे जो आज स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में  विश्वपटल पर विद्यमान हैं ।

अखंड  भारत

अखंड भारत में आज का बर्मा, बांग्लादे, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत यह सभी भारत का हिस्सा थे । आज भारत के अभिन्न भाग स्वतंत्रता से गुलामी के चरणबद्ध काल में अलग देशों का कारण बन गए ।

सम्पूर्ण भारत

उतर से दक्षिण भारत                                महाभारत काल, भरत काल

भारत से तिब्बत तक                                महाभारत काल, भरत काल

भारत से अफगानिस्तान तक                    महाभारत काल से अशोक काल पूर्व तक

भारत से बर्मा: म्यांमार तक                       सम्राट अशोक काल से मुगल पूर्व तक

वर्तमान भारत                                          मुगल काल

वर्तमान भारत                                          अंग्रेज काल

भारत विभाजन

भारत विभाजन: अफगानिस्तान            19.08.1919

भारत विभाजन: बर्मा -म्यांमार 01.04.1937 भारत भूमि से स्वतंत्र कर गुलाम दे      

                                                        04.01.1948 एक स्वतंत्र राष्ट्र नि-नि

भारत विभाजन: पाकिस्तान         14.08.1947 : नि-नि

भारत विभाजन: तिब्बत 1962 : नि-राहु

आदि भारत पुनर्विलय

आदि भारत पुर्नविलय: जम्मू-कश्मीर 26-27.10. 1947 : नि-नि

आदि भारत में पुनर्विलय: गोवा 19.12.1961  8.30 सायं : नि-राहु

आदि भारत में पुनर्विलय: दमन 1912.1961  8.30 सायं : नि-राहु

आदि भारत में पुनर्विलय: दीव 19.12.1961  8.30 सायं : नि-राहु

आदि भारत में विलय: सिक्किम            16.05.1975 : बुध-मंगल

आदि भारत में विलय: लद्दाख                1962 : नि-राहु

स्वतंत्र भारत में विलय

अंग्रेज भारत शासन काल: ईस्ट इंडिया शासन - अंग्रेजी शासन

अंग्रेजी शासन - स्वतंत्रता दिवस         15.08.1947 शनि-शनि

भारत विलय: जम्मू-कश्मीर             22.10.1947: नि-नि

                                                 25.10.1947: शनि-नि

भारत विलय: जम्मू-कश्मीर            26.10.1947 SIGNED : नि-नि

                                               27.10.1947 प्रभावी : नि-नि

31.10.2019 00.00 रात्रि as new teritory चंद्र-शनि

भारत विलय: अंडमान निकोबार    01.11.1956: नि-सूर्य

गोवा पुर्तगाली शासन काल:             1510 - 19.12.1961: नि-राहु

भारत विलय: गोवा             19.12.1961 8.30 रात्रि : नि-राहु

भारत विलय: दमन             19.12.1961 : नि-राहु

भारत विलय: दीव             19.12.1961: नि-राहु

भारत विलय: लद्दाख             1962: नि-राहु

भारत विलय: सिक्किम             16.05.1975: बुध-राहु

भारत विलय: पांडिचेरी                    01.11.1954 नि-शुक्र

                                                  1956 नि-सूर्य/चंद्र

                                                 16.08.1962 फ्रांस admit & confirm* नि-राहु

भारत में पुनर्विलय

भारत में पुनर्विलय: जम्मू-कश्मीर 26-27.10.1947: नि-नि

भारत विलय: पांडिचेरी                    01.11.1954 नि-शुक्र

                                                  1956 नि-सूर्य/चंद्र

                                                 16.08.1962 फ्रांस admit & confirm* नि-राहु

भारत में पुनर्विलय: अंडमान निकोबार 01.11.1956: नि-सूर्य

आदिकालीन भारत की सभ्यता व संस्कृति समस्त विश्व पर व राष्ट्र का क्षेत्र भरत के भारत बनाम आर्य का आर्यावर्त सिंधु घाटी सभ्यता से अफगानिस्तान से संपूर्ण आज का आजादी के समय का भारत था ।

सम्राट अशोक के काल तक भारत की सत्ता बर्मा बनाम आज के म्यामांर से अफगानिस्तान तक थी ।

गुलाम भारत

अखंड भारत की क्ति को अंग्रेजी सल्तनत ने कालक्रम में बर्मा बनाम म्यामांर के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बनाया । फिर जाते-जाते भारत के एक और टुकड़े कर पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र बनाया ।

स्वतंत्र भारत

अखंड भारत में से बर्मा, पाकिस्तान के विभाजित हो जाने के बाद अरसों की गुलामी से निकलकर अपने पैरों पर खड़ा हो रहे भारत पर उसके सबसे विश्वासी मित्र ने विश्व इतिहास के सबसे बड़े विश्वासघाती गद्दार के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराते तिब्बत को हथिया लिया । यह दीगर बात है कि यह भेड़िया बनाम इस भेड़िया की औकात अंग्रेजों के शासनकाल में एक कुते की ऐसी भूंकने तक की भी नहीं थी । आप सदा एक शत्रु का सम्मान कर सकते हैं मगर एक गद्दार का नहीं ।

भारत में विलय

जम्मू-कश्मीर को कुछ दिनो के लिए अंग्रेजों से भारत को आजाद कर उसे भारत का हिस्सा प्रदान करने से वंचित तो नहीं किया मगर उसका अधिकार अपने पास रखा । इसका अधिकार उसके बाद जम्मू-कश्मीर जन्म के साथ भारत को मिला । इस प्रकार आदि भारत में जम्मू-कश्मीर विभाजन व विलय दोनो का अंतराल माना जा सकता है । 

इसमे शक नहीं कि स्वतंत्रता पूर्व जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान की भांति ही भारत का अभिन्न अंग था । मगर स्वतंत्र भारत का जन्म जम्मू-कश्मीर के बगैर हुआ था । इसका अधिकार भारत के तात्कालीन अंग्रेजी शासक ने अपने पास रखा और उसे अपने अधीन भी रखा। इस प्रकार आदि भारत की कुंडली में या के अनुसार जम्मू-कश्मीर भारत से कभी विभाजित हुआ ही नहीं । अलबत्ता स्वतंत्र भारत का जन्म चूँकि इसके बगैर हुआ अतः कहा जा सकता है कि आदि भारत का मुख्य भूखंड आजाद हो गया मगर उसके कुछ भूखंड आजाद होने बाकि रह गए । उसमे कुछ स्वतंत्र राष्ट्र बने । मगर जम्मू-कश्मीर कभी न आजाद हुआ न स्वतंत्र राष्ट्र बना बल्कि सदा की भांति आदि भारत का अंग रहा । स्वतंत्र भारत में जम्मू-कश्मीर का आना आदि भारत में जम्मू-कश्मीर का पुनर्विलय भी नहीं बल्कि स्वतंत्रता का अभिप्राय माना जाएगा । आदि भारत का एक आदि भूखंड स्वतंत्र हुआ और आदि भारत के ही एक नवभूभाग राष्ट्र भारत का कुछ दिनों बाद कालांतर में भाग बना । इस प्रकार इसे आदिकालीन भारत का स्वतंत्र भारत में रूपांतरण माना जाएगा । जिस प्रकार किसी राष्ट्र के राज्य की सीमाएं अपनी अंदरूनी सीमागत या सतात्मक इत्यादि मामले में अपना स्वरूपांतरण व हस्तांतरण करती रहती हैं ।

स्वतंत्र भारत भूखंड आकलन

अखंड व गुलाम भारत ने आजादी से पूर्व पाकिस्तान और भारत की आजादी के बाद भारत ने तिब्बत का भूखंड खोया । इस प्रकार आजाद भारत में भारत ने एकमात्र सबसे बड़ी भूखंड त्रासदी तिब्बत की झेली । जबकि इसके हिस्से में जम्मू-कश्मीर विलय, गोवा विलय, सिक्किम विलय सहित लददाख विलय जैसी उपलब्धियां भी आईं । 

भारत भविष्य

अखंड भारत या गुलाम भारत की कोई कुंडली नहीं है अतः इस भूखंड के सबसे नए भाग स्वतंत्र भारत की कुंडली से वर्तमान भारत का भविष्यफल निकालना सही रहेगा ।

भारत और जम्मू-कश्मीर

भारत की आजादी के समय में भारत के जन्म से पहले पाकिस्तान का जन्म हुआ जबकि भूखंड एक ही था । भारत की आजादी के साथ अभिन्न जम्मू-कश्मीर उस अखंड भूखंड का हिस्सा भारत को मिला जो भारत गुलाम भारत से आजाद भारत के रूप में साथ आजाद हुआ । अपितु जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक दस्तावेज व स्वतंत्रता आदि का काल 27 अक्टूबर 1947 है । यद्यपि राजा हरिसिंह ने 26 तारीख को दस्तखत कर दिए थे फिर भी यह 27 तारीख से प्रभावी-इफेक्टेड हुआ था । इस प्रकार दोनो तिथि की महता है । आरंभिक तिथि चूंकि 8 मूलांक है इसलिए यह भारत के फेवर में है जबकि इसका इफेक्टेड होना 9 मूलांक है इसलिए इस सत्ता को लेकर शासकीय समस्या बनी रहेगी ।

भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसकी राशि कर्क है जबकि जम्मू-कश्मीर का जन्म कर्क लग्न और मीन राशि में हुआ है । कर्क लग्न चूंकि भारत का तृतीय भाव है अतः भारत की भूमि का व्ययस्थान होने के कारण भूमि का यह क्षेत्र बनाम भूखंड भारत के लिए आरंभ से ही परेषानियों का सबब बना है । इसके अतिरिक्त भारत का जन्म मूलांक 6 है जबकि कश्मीर का जन्म मूलांक 9 है जो कि दोनो परस्पर एक-दूसरे के शत्रु हैं । इसके अलावे भारत का संविधान सह गणतंत्र दिवस 26 जनवरी होने के कारण मूलांक 8 है यह भी कश्मीर के जन्म मूलांक का शत्रु है अपितु दोनो अंकों में परस्पर शत्रुता है । ऐसे में भारत का इस भूखंड को लेकर समस्याग्रस्त होना भौगोलिक, सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक आदि स्तर पर स्पष्ट रूप से स्पष्ट होता है ।

जम्मू-कश्मीर की जन्मकुंडली में लग्न में मंगल व नि का होना जो कि यूं भी शुभ नहीं माना जाता क्योंकि दोनो ग्रहों में परस्पर सौम्यता नहीं है, उसपर भी नीच के मंगल के साथ त्रुगत नि का होना इसका और भी उग्र व विवादित होना स्पष्ट करता है । कश्मीर की कुंडली कर्क लग्न और मीन राशि की है । लग्नेष चन्द्र मीन राशि में नवम में स्थित हैं यद्यपि भाव में अष्टम में है और चन्द्रेश बनाम राशीश वृहस्पति वृश्चिक में पंचम में यद्यपि भाव में चतुर्थ में है । कर्क लग्नस्थ मंगल और नि लग्न व भाव दोनो के अनुसार लग्न में हैं । सूर्य, शुक्र और बुध तुला में हैं जबकि वृहस्पति, केतु वृश्चिक में हैं व राहु वृष में हैं यद्यपि भाव में वृहस्पति, केतु चतुर्थ और राहु दम में हैं । कर्क लग्न में नीच के मंगल और मारकेश नि का परस्पर त्रु ग्रह के रूप में लग्न व भाव लग्न दोनो के अनुसार ही लग्न में होना इसके हमेशा बाधाग्रस्त रहने का सूचक है । मंगल के कारण स्थिति उग्र तथापि नि के कारण रणनीतिक व कूटनीतिक भी होगी । लग्नेश का अष्टम मृत्यु भाव में होना भी इसके लिए शुभ नहीं हैं । शायद यही कारण है कि कश्मीर का एक हिस्सा विखंडित हो पाक के कब्जे में भी है जिसे हम पाक अधिकृत कश्मीर के रूप में जानते हैं ।

भारत और राज्य

भारत के अलग-अलग राज्यों की जन्मकुंडली अलग-अलग है अतः ऐसे में आजादी के बाद एक और भूखंड का आधिकारिक विलय होने से ज्यादा फर्क नहीं पर्डेगा । विविध राज्यों के साथ भारत के संबंधों आदि की समीक्षा के लिए राष्ट्र व राज्य की परस्पर कुंडली आदि का परस्पर अध्ययन अनिवार्य है । क्योंकि किसी भी राष्ट्र में कई बार कई भूखंड युग्म तो कई विभाजित तो कई पुनर्विलय हो जाते हैं । मसलन भारत की आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर, गोवा जैसे भूखंड का विलय हुआ तो कश्मीर व तिब्बत जैसे भूखंड का पाक व चीन द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर, चीन अधिकृत तिब्बत में विभाजन सम हुआ तो भारत ने लददाख जो कभी चीन का हिस्सा था चीन की गददारी के बाद उसके तिब्बत को गुलाम करने के क्रम में लददाख को अपने अधीन किया । तो कालांतर में सिक्किम की स्वेच्छा से उसका अपने में विलय किया । इसी प्रकार भारत ने पाक के कुछ हिस्सों का अपने में पुनर्विलय भी किया ।

भारत को अगर कश्मीर की समस्या या इस प्रकार या किसी अन्य प्रकार की समस्या का हल निकालना या पाना है तो ज्योतिषीय दृष्टिकोण से उसे इन संदर्भों का ध्यान रखना ही होगा ।

भारत, पाकिस्तान व चीन

 पाकिस्तान का मूलांक 5 जबकि चीन का 1 है जबकि पाक का लग्न मिथुन जबकि चीन का तुला  है । भारत के जन्मांक 6 व गणतंत्रांक 8 का 5 मित्र जबकि 1 त्रु है, साथ ही पाक का लग्न मिथुन भारत के लिए धन भाव जबकि चीन का लग्न तुला भारत का 6: बनाम रोग, रिपु, त्रु है  भाव है: साथ ही चतुर्थ के चतुर्थ बनाम भूमि के भूमि का व्यय भाव है । यही कारण है कि चीन भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या है । 

भारत को चाहिए कि चतुर्थ स्थान बनाम भूस्थान का ध्यान रखते हुए एक ऐसे लग्न में जम्मू- कश्मीर को आर्टिकल 370 से भारत को मुक्त कर भारत में विलय किया जाए जो कि भूमि अर्थात् चतुर्थ स्थान के लग्न का रिपु, मृत्यु, व्यय आदि स्थान बनाम लग्न न हो और न ही भारत की लग्न-कुंडली का रिपु, मृत्यु, व्यय आदि स्थान हो । इस प्रकार चतुर्थ से षष्ठ नवम भाव मकर, चतुर्थ से अष्टम भाव मीन, चतुर्थ से व्यय भाव कर्क लग्न में ऐसा नहीं होना चाहिए । इसी प्रकार भारत के लग्न से  षष्ठ तुला, अष्टम धनु, व्यय मेष लग्न में भी ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए ।

भारत के लग्न वृष, भूमि स्थान सिंह, भूमि स्थान का धन स्थान पंचम कन्या, चतुर्थ का चतुर्थ बनाम भूमि का भूमि स्थान वृश्चिक, चतुर्थ का सप्तम साझेदार स्थान बनाम भारत का कीर्ति स्थान कुंभ लग्न इसके लिए अतिशुभ हैं । भारत का मूलांक 6 या भारत के संविधान का मूलांक 8 इसके लिए सर्वोतम रहेगा । इस प्रकार भारत की समस्या का समाधान हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर जो कि भारत का अभिन्न अंग है सदा के लिए समस्या व विकारमुक्त हो जाएगा ।

ज्योतिष के अनुसार लग्न की शुभ स्थिति से ही अधिकांश हल हो जाएगा । यद्यपि दशा का ध्यान भी रखना होगा । लग्न, लग्नेश, लग्न नक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र का नक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र का उपनक्षत्र यदि स्वगृही या उच्च ग्रह हो तथा साथ ही वह लग्न और भाव से लग्न, दम, एकाद जैसे शुभ स्थानों में ही स्थित् हो, अथवा कम-से-कम 6: बनाम रोग, रिपु, त्रु , 8: मृत्यु, 12: व्यय स्थान या भाव से संयुक्त न हों व परस्पर त्रु भाव व दृष्टि से परे हो तो और भी अच्छा, ऐसे योग में ऐसे लग्न में कार्य करने में उस कार्य को शुभत्व प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकते । साथ में दशा का विचार करना आवश्यक है क्योंकि इससे आरंभ से ही शुभ फल मिलने लगेंगे ।

भारत : THE PREDICTED ANALYSIS

:: अमित कुमार नयनन ::


भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसकी राशि कर्क है। वृष स्थिर तो कर्क चर राशि है अतः स्थिर व चरात्मक दोनो प्रवृति का इसकी प्रवृति व प्रकृति में समावेश होगा । वृष व कर्क दोनो ही राशियां स्वभाव से मृदु हैं अतः इस देश की प्रकृति मृदु व स्नेहशील होगी व इसमे सहनशीलता व विवेकशीलता अन्य देशों की अपेक्षा अधिक रहेगी । लग्नेश शुक्र का राशीश चन्द्र के साथ तृतीय भाव में युति इसके दीर्घकालिक अवस्था को सबलता से दर्शाता है । लग्न में लग्नेश शुक्र मित्र राहु  अपनी उच्च राशि में बैठा है । इस प्रकार लग्न के लिए यह एक अच्छी स्थिति है । लग्नेश का तृतीय पराक्रम स्थान में सूर्य, चन्द्र, बुध, शनि के साथ बैठना व केतु से देखा जाना इस देश के विविध लोगो व सभ्यता व संस्कृति के दर्शन को सरल तरीके से इंगित करता है । तृतीय में विविध प्रकृति के पंचग्रह की युति कुछ हद तक संत या एकाकी योग को भी बताता है । इसमे भी संदेह नहीं कि भारत धर्म और आध्यात्म का धनी देश है । इस प्रकार इसकी विविधता में एकता का बल लक्षित होता है जो कि पूर्णतया सही है । भारत भौगोलिक रूप से तीन दिशाओं पूर्व, पश्चिम, दक्षिण दिशा की ओर जल से घिरा प्रायद्वीप है जिसके एकमात्र उत्तर में विशालकाय हिमालय व भूखंड आदि हैं।  

भारत की कुंडली में तृतीय पराक्रम स्थान जितना प्रबल है उतना ही चतुर्थ जनता, अचल संपति व भूमि स्थान कमजोर है । तृतीय स्थान में जो ग्रह बल, पराक्रम आदि की वृद्धि कर रहे हैं वही ग्रह जनता, अचल संपति व भूमि के लिए बाधा भी दे रहे हैं क्योंकि तृतीय स्थान चतुर्थ स्थान का व्यय स्थान है। यह युति चूँकि कर्क राशि में बन रही है अतः उतर दिशा भारत के लिए इस मामले में सदा चिंता का मसला रहेगा । तृतीय स्थान में पंचग्रह युति जहां बल व पराक्रम के लिए अच्छी है वहीं यह अचल संपति व भूखंड के लिए बिल्कुल सही नहीं है। इसी कारण तृतीयस्थ शनि महादशा में पाक व चीन युद्ध हुआ व तिब्बत एवं कैलाश व मानसरोवर जैसे भूखंड इस वक्त चीन के कब्जे में हैं । अतः कुल 9 महादशा ग्रहों में इन पांच ग्रहों की दशा में सीमा विवाद अक्सर बना रहेगा । कुल 120 साल की महादशा में सनि 19 साल, बुध 17 साल, शुक्र 20 साल, सूर्य 6 साल व चन्द्र 10 साल आते हैं जो कि 82 साल अर्थात कुल दशा का दो-तिहाई से भी ज्यादा साल आते हैं अतः संक्षेप में भारत को अपने दशाकाल में अक्सर सीमा व भूमि विवाद बना रहेगा और इन पांच ग्रहों की दशा में यह विशेष होगा ।

भारत की आजादी के समय ज्योतिषीयों के द्वारा आजादी का निर्धारित किया गया समय पूर्ण शुभ न होने के कारण आज यह स्थिति है । यही पंचग्रह यदि लग्न, दशम या एकादश में होते तो देश की स्थिति कुछ और होती । फिर भी बल व पराक्रम का स्थान मजबूत होने के कारण यह एक मजबूत देश है और रहेगा ।  

भारत की जन्मकुंडली में वर्तमान चन्द्र महादशा फल

चन्द्र महादशा: 21 मई 2015 से 21मई 2025 तक चल रही चन्द्र महादशा में चन्द्र महादशा की चन्द्र अंर्तदशा 21 मई 2016 तक व्यतीत हो चुकी है।  इसके उपरांत चन्द्र महादशा में मंगल अंर्तदशा से लेकर चन्द्र महादशा में अन्य समस्त अंर्तदशा का फल निम्न उल्लेखित है । चन्द्र महादशा की 10 साल की महादशा पूर्णता के पश्चात 21 मई 2025 से 7 साल की मंगल महादशा 21 मई 2032 तक चलेगी ।।  

चन्द्र महादशा बनाम अंतर्दशा फल :ः भारत की जन्मकुंडली में इस वक्त चन्द्र की महादशा चल रही है । यह स्वबल, पराक्रम, संचार की दशा है मगर साथ ही भूमि के लिए व्ययषील होने के कारण भूविवाद की उलझनें बनी रहेंगी । इसके साथ यह मानसिक कार्य, नेवी व स्त्रीशक्ति के लिए विशेष लाभ लेकर आएगी । वर्तमान में चन्द्र महादशा में मंगल की अंतर्दशा 21 मई 2016 से 21 दिसंबर 2016 तक चल रही है, मंगल द्वितीय भाव में व्ययेश होकर बैठा है अतः अनपेक्षित रूप से विदेशी, एन आर आई, परदेस से सहयोग व आर्थिक लाभ अपेक्षित है। संतति भाव पर मंगल की दृष्टि खेल मुख्य रूप से आक्रामक खेलों के नजरिए से शुभ है । यद्यपि मंगल मारकत्व प्रभाव से भी देख रहा है अतः खेल या फिल्म जगत की विशेष हस्ती का वियोग आदि अपेक्षित है । मंगल सप्तम का स्वामी होने के कारण साझेदारी, आयात निर्यात, इंटरनेषनल व्यापार आदि में प्रसार दे रहा है । मंगल का प्रभाव 21 दिसंबर 2016 तक है । तत् चन्द्र महादशा में राहु की अंतर्दशा आरंभ हो जाएगी जो कि 21 दिसंबर 2016 से 21 जून 2018 तक जारी रहेगी। राहु लग्न में उच्च का हो तृतीयस्थ शुक्र का फल भी दे रहा है । इस प्रकार यह संचार व्यवस्था के लिए अतिशुभ है । परिवहन, कूरीयर, टेलिमीडिया, मीडिया जैसे क्षेत्रों मे विशेष विकास होगा । फिल्म जगत के लिए भी यह एक शुभ व सुखद दौर है । इस प्रकार 18 माह की यह अंतर्दशा अपने शुभ प्रभाव के साथ जारी रहेगी । तत् 16 माह की वृहस्पति अंतर्दशा का दौर 21 जून 2018 से 21 अक्टूबर 2019 तक मिश्रित है । एक ओर तो यह आर्थिक लाभ करा रहा है मगर साथ ही साझेदार या साझेदारी या अन्यत्र समस्या भी दे रहा है । इसे मिश्रित कहा जा सकता है । तत् 19 माह के शनि अंतर्दशा का दौर21 अक्टूबर 2019 से 21 मई 2021 तक होगा । यह भूविवाद, आतंकवाद आदि मुद्दों का समय है । यह देश मे उथल पुथल को भी दर्शा रहा है । यद्यपि समस्याओं का अंततः समाधान होगा मगर विशेषत: उतर-पश्चिम, पूर्वोतर भारत व विदेशी क्षेत्र में भारत को सावधान रहना होगा । सीमा विवाद के मामले में भारत को पूर्ण रूप से सतर्क रहने की जरूरत है । तत 17 माह की बुध अंतर्दशा 21 मई 2021 से 21 अक्टूबर 2022 तक व्यापारिक संदर्भ की अतिशुभ दशा है । इस दरम्यान बैकींग सेक्टर, स्टाॅक मार्केट, मनी मैटरर्स, आर्थिक क्षेत्र में मुख्यतः प्रसार होगा । तत् 7 माह की केतु अंतर्दशा 21अक्टूबर 2022 से 21 मई 2023 तक मिश्रित आक्रामक तेवर के साथ आएगी । अच्छा व बुरा दौर आकस्मिक प्रभाव के साथ होगा । आकस्मिक उठापटक व अप्रत्याशित घटनाक्रम का समय है । तत् 20 माह की षुक्र अंतर्दशा 21 मई 2023 से 21 जनवरी 2025 तक कला, सिनेमाई, मीडिया, संचार, परिवहन आदि के लिए सुफल लेकर आएगा । यह दौर मुख्यतः लव, रोमांस, स्त्री संबंधी सम मनोरंजक फिल्मों का होगा, एक्शन का कम प्रभाव होगा, ऐसी फिल्में ज्यादा प्रसार व उपलब्धि अर्जित करेंगी व भारतीय सिनेमा को समृद्ध करेंगी । तत् 6 माह की सूर्य अंतर्दशा 21 जनवरी 2025 से 21 जुलाई 2025 भूविवाद के साथ स्वबल व पराक्रम की दशा भी होगी । यह एक राजनैतिक विकलता व सफलता का दौर होगा । इसी के साथ तत् चन्द्र महादशा की 10 साल की महादशा की अवधि पूर्णता उपरांत 7 साल की मंगल महादशा का आरंभ होगा ।।

भारत व गोचर

भरत के भारत से आर्यावर्त से इंडिया तक का प्राचीन से नवीन युग तक इस प्रायद्वीपीय भूमि पर बहुत कुछ बदला है । भारत की प्राचीन राशि मकर व वर्तमान राशि कर्क मानी जाती है । मकर राशि के अनुसार एकादश शनि गोचर शुभ हैं जबकि कर्क राशि के अनुसार पंचम शनि समस्याएं पैदा कर रहे हैं । यह समस्याएं जनता, जनसंख्या, फिल्म, खेल, मनोरंजन आदि के लिए है। वर्तमान भारत के लिए वर्तमान कर्क राशि को देखना उपयुक्त रहेगा अपितु दीर्घकालिक बातों के लिए मकर राषि के अनुसार गणना उचित होगी। मकर से अष्टम वृह. साल के पूर्वार्ध में बाधाकारक व तत भाग्य वृधि का फल बता रहे हैं जबकि कर्क से द्वितीय वृह. साल के पृर्वाध में आर्थिक सफलता, मित्र देशों की वृधि जैसे फल दे रहे हैं तत से परिवहन, संचार, प्रसार आदि के क्षेत्र में शुभ फल दे रहे हैं। इस प्रकार गोचर अवस्था शुभ है ।।

Wednesday, December 18, 2024

भारत, पाकिस्तान व चीन

भारत, पाकिस्तान व चीन

 पाकिस्तान का मूलांक 5 जबकि चीन का 1 है जबकि पाक का लग्न मेष जबकि चीन का तुला  है । भारत के जन्मांक 6 व गणतंत्रांक 8 का 5 मित्र जबकि 1 त्रु है, साथ ही पाक का लग्न मेष  भारत के लिए 12 बनाम व्यय भाव जबकि चीन का लग्न तुला भारत का 6 बनाम रोग, रिपु, त्रु भाव है' साथ ही चतुर्थ के चतुर्थ बनाम भूमि के भूमि का व्यय भाव है । यही कारण है कि चीन भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या है । 

भारत को चाहिए कि चतुर्थ स्थान बनाम भूस्थान का ध्यान रखते हुए एक ऐसे लग्न में जम्मू- कश्मीर को पुनः स्थापित किया जाए जो कि भूमि अर्थात् चतुर्थ स्थान के लग्न का रिपु, मृत्यु, व्यय आदि स्थान बनाम लग्न न हो और न ही भारत की लग्न कंुडली का रिपु, मृत्यु, व्यय आदि स्थान हो । इस प्रकार चतुर्थ से षष्ठ नवम भाव मकर, चतुर्थ से अष्टम भाव मीन, चतुर्थ से व्यय भाव कर्क लग्न में ऐसा नहीं होना चाहिए । इसी प्रकार भारत के लग्न वृष से षष्ठ तुला, अष्टम धनु, व्यय मेष लग्न में भी ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए ।

भारत के लग्न वृष, भूमि स्थान सिंह, भूमि स्थान का धन स्थान पंचम कन्या, चतुर्थ का चतुर्थ बनाम भूमि का भूमि स्थान  वृश्चिक , चतुर्थ का सप्तम साझेदार स्थान बनाम भारत का कीर्ति स्थान कुम्भ लग्न इसके लिए अतिशुभ हैं । भारत का मूलांक 6 या भारत के संविधान का मूलांक 8 इसके लिए सर्वोतम रहेगा । इस प्रकार भारत की समस्या का समाधान हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर जो कि भारत का अभिन्न अंग है सदा के लिए समस्या व विकारमुक्त हो जाएगा ।

ज्योतिष के अनुसार लग्न की शुभ स्थिति से ही अधिकांश हल हो जाएगा । यद्यपि दशा का ध्यान भी रखना होगा । लग्न, लग्नेश, लग्न नक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र का नक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र का उपनक्षत्र यदि स्वगृही या उच्च ग्रह हो तथा साथ ही वह लग्न और भाव से लग्न, दम, एकाद जैसे शुभ स्थानों में ही स्थित हो, अथवा कम-से-कम 6: बनाम रोग, रिपु, त्रु , 8: मृत्यु, 12: व्यय स्थान या भाव से संयुक्त न हों व परस्पर त्रु भाव व दृष्टि से परे हो तो और भी अच्छा, ऐसे योग में ऐसे लग्न में कार्य करने में उस कार्य को शुभत्व प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकते । साथ में दशा का विचार करना आवश्यक है क्योंकि इससे आरंभ से ही शुभ फल मिलने लगेंगे ।

भारत और पाकिस्तान मैं इतना विवाद क्यों है :-

लग्न

भारत का लग्न वृष और पाकिस्तान का लग्न मेष है । वृष का व्यय भाव मेष होता है तथा मेष का धन भाव वृष होता है । भारत का  लग्न वृष पाकिस्तान के लग्न मेष का धन भाव है तथा पाकिस्तान का लग्न मेष भारत के लग्न का व्यय भाव है ।

राशि

भारत की राशि कर्क और पाकिस्तान की राशि मिथुन है । भारत की राशि कर्क पाकिस्तान की राशि मिथुन  का  धन भाव तो पाकिस्तान की राशि मिथुन भारत की राशि कर्क का व्यय भाव है ।

अंक विज्ञान

अंक विज्ञान के अनुसार पाकस्तान से पाकिस्तान नाम करने से पाक का मूलांक ५ से ६ हो गया जो भारत का जन्माँक मुलाँक है । इस तरह भारत इसपर हावी रहेगा या होगा । ऐसी ही स्थिति भारत और चीन के बीच भी है, भारत का मूलांक ६ है तथा चीन का चाइना शब्द ६ मुलाँक से बना है । इस तरह भारत के लिए यह अनुकूल ग्रह स्थिति है; इस ग्रहीय स्थिति के कारण भारत चीन पर हावी रहेगा अथवा चीन भारत का समर्थन करेगा । अगर चीन समर्थन नहीं भी करता है फिर भी भारत हावी रहेगा ।

स्वर अंक विशेष

एक और रोमांचक तथ्य यह है, स्वर अंक से भारत और पाकिस्तान समान हैँ मगर चीन बलवान है । इसलिए भारत जबतक भारत के नाम से पुकारा जाता रहा चीन का दबदबा अचानक बढ़ा और उसने भारत का तिब्बत हड़प लिया; स्वर विज्ञान से तिब्बत भी चीन से स्वरांक में ऋणी है इसलिए वो उसका गुलाम बन गया ।

मगर स्वरांक पुकारू नाम पर अधिक प्रभावी होता है । मसालान किसी का सर्टिफिकेट नाम कुछ भी हो मगर जिस नाम से सम्बोधित करते उसकी तंद्रा उसे सबसे पहले सचेत करे अथवा जिस नाम से अधिक स्वयं में सक्रिय हो उस नाम का प्रथम अक्षर ही स्वरांक प्रधान होता है ।

भारत कालांतर में इंडिया के नाम से प्रचलित व सम्बोधित हुआ और हो रहा है, इस नाम अनुसार चीन और पाकिस्तान दोनो ही भारत के ऋणी हैँ । स्वरांक विधि अनुसार दोनो अधिकतम पॉइंट के साथ ऋणी हैँ । इसलिए समय के अनुसार भारत बनाम इंडिया ने तिब्बत घटना के बाद भी चीन के मुक़ाबले अनुपातिक रूप से अतिश्य वृद्धि कर ली है तथा पहले के मुक़ाबले कमजोर स्थिति से सबल हो सीधे स्थिति में खड़ा हो गया है ।

स्वरांक विधि वस्तुतः उच्चारण आधारित पद्धति है । अतः किसी के अल्फाबेट  के प्रथम अक्षर की जगह उसके उचारारन् में आ रहे अक्षर को प्रधानता दी जाती है । मसलन : स्कूल को सकूल पढ़ते हैँ मगर इसकूल बोलते हैँ, उच्चारण चुंकि इसकूल है अतः स्वर विज्ञान में इसकूल अनुसार ही गन्ना होगी । स्कूल के स की जगह इसकूल के ई को प्रथम अक्षर के रूप में लेकर गन्ना की जाएगी । 

Monday, December 16, 2024

RAHUKAAL

 

-Amit Kumar Naynan

RAHUKAAL

*Sunday       4.30 PM - 6.00 PM

*Monday      7.30 AM - 9.00 PM

*Tuesday      3.00 PM - 4.30 PM

*Wednesday 12.00 Noon - 1.30 PM

*Thursday      1.30 PM - 3.00 PM

*Friday            10.30 PM - 12.00 PM

*Saturday        9.00 AM - 10.30 AM

RAHUKAAL happens only in day period

RAHUKAAL  how influenced by Rahu  is uncleared

RAHUKAAL is an unauspicious period for any work special for any start

RAHUKAAL time has been adjusted by  adjusting time with above time period
How to adjust
See that above time period is shown for our clock time.
which is not mentioned for Delhi. 
it is mentioned for kaashi means Banaras.
To adjust time for other places should add or deduct with differ length time from that place s sunrise/sunset time calculating sunrise to sunset time,
At summary at East from kaashi RAHUKAAL will come early and from West of kaashi it will come later. 

If anyone take1 hour less from starting of RAHUKAAL starting time and counts 1 hour more from its end time, then RAHUKAAL will not come in this time area anyhow adding or destructing in any manner.



LEGAL VASTU

 

*WORLD*

 

साभार ; https://sheetanshukumarsahaykaamrit.blogspot.com/

⏳ In September 2020, China will suffer from querrel, litigations, negativity ..

🏹 It may take War Shape also.

🎯 In present condition, all is possible.

🎳In 2020, till remaining period of year means till Dec 2020 above effect remain effective.

PITA SURYA FALAM

 

-अमित कुमार नयनन
सूर्य को ज्योतिष में पिता का दर्जा प्राप्त है । सूर्य से आत्मा, पिता, पद, कीर्ति, राजनीति,दाएं नेत्र आदि का ज्ञान होता है।सूर्य को धर्म में पृथ्वी पर साक्षात् नजर आनेवाले देवता के रूप में माना गया है । ज्योतिष में भी सूर्य को पृथ्वी पर सबसे ज्यादा प्रभाव प्रदान करनेवाले ग्रह के रूप में दर्जा प्राप्त है । जो कि सूर्य की प्रत्यक्ष भूमिका से मेल खाती है । सूर्य हमारा रक्षक, दाता, विधाता है ।।सूर्य एवं द्वितीय व द्वितीयेश जो कि दाएं आंख के प्रतिनिधि भाव हैं, पाप ग्रह से पूर्ण रूप से पीड़ित हों तो दाएं नेत्र में समस्या होगी अथवा वह अंधा भी हो सकता है । इसमे षष्ठ, अष्टम व द्वादश का प्रभाव ज्यादा हानिकारक है । ऐसी स्थिति में शुभ घर के मालिक पाप ग्रह भी नेत्र के संबंध् में ज्यादा शुभ फल नहीं देते । सूर्य, लग्न एवं चतुर्थ स्थान से आत्मा का ज्ञान होता है । अगर लग्नेश के साथ सूर्य व चतुर्थ स्थान पर केवल शुभ ग्रह का प्रभाव हों तो जातक संुदर आत्मा का होेगा, व पाप प्रभाव रहने से ग्रहों के अनुसार पापात्मा होगा । दोनो प्रभाव रहने से मिश्रित व ग्रहदशानुसार वृत्ति होगी ।इसमे यह बात दीगर है कि कर्म का स्थान दशम है । एक अच्छा इंसान भी बुरा व एक बुरा इंसान भी अच्छा कर्म कर सकता है इसलिए वृत्ति कैसी भी हो, उसके आत्मा में दशानुसार जो भी चल रहा हो, वह करेगा क्या यह दशम स्थान बनाम कर्म-भाव से ज्ञात होगा । अगर सूर्य पंचम से जुड़ा है तो एक कुलदीपक संतान को इंगित करता है । अगर वह स्वया पुरूष राशि में हो तो इस बात की संभावना बलवती हो जाती है व संतान पुत्रा होगा अन्यथा स्त्री राशि में रहने से संतान पुत्री । पंचमेश सूर्य की भी पुरूष या स्त्री राशि में बलवती स्थिति यही फल देता है ।सूर्य एवं दशम मतांतर से नवम स्थान से पिता का ज्ञान होता है । अगर दोनो पाप-प्रभाव में हों तो पिता का सुख अल्प या नहीं होता है । साथ में शुभ दृष्टि आदि का प्रभाव भी रहने से मतांतर अथवा पिता से दूर रहने का योग बनता है ।सूर्य एक राजसी स्वभाव के ग्रह हैं । दशम स्थान पद का है इसलिए यह राज-कार्य से जुड़े पद व कार्य के द्योतक हैं । सूर्य लग्न में स्थानबली तो दशम स्थान में दिग्बली होता है । इस तरह इस स्थान में वह अन्य ग्रहों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत होता है । वैसे भी सूर्य अन्य ग्रहों की अपेक्षा पृथ्वी पर सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़नेवाले ग्रहों में है, इसलिए इसकी किसी भी स्थान व भाव में स्थिति विशेष प्रभाव बनाती है ।सूर्य शरीर का कारक ग्रह है, इसलिए यह लग्न का कारक ग्रह भी है । अतः दशम में इसकी उपस्थिति स्वास्थ्य-कार्य या विभाग से भी जोड़ती है ।सूर्य सरकारी, अर्धसरकारी आदि तमाम कार्यों से भी जोड़ता है । सूर्य का एकादश से संपर्क राज्यलाभ कराता है । किसी ग्रह का शुभाशुभ फल उसपर शुभाशुभ ग्रह की स्थिति व उसके शुभकत्र्तरी व पापकत्र्तरी योग पर निर्भर करता है । किसी भाव का अध्ययन उसके अध्पिति से शुरू होता है । उस भाव में बैठे ग्रह तत् उसपर दृष्टि, कत्र्तरी आदि योग से होते हुए क्रमशः फल देता है । भाव व ग्रह के फल दशानुसार फलित होते हैं ।

ASTRO SYSTEM

  


In the Astro world reading through Horoscope some effective System are  effective, accurate..in prediction @ Worldwide.

Vedic Astro

Saayan System

Krishnamurti Paddhati = K.P. System


Vedic Astro is mainly based on Rashi and Nakshatra System.

Saayan System is mainly based on 360 degree Orbit System.

K.P. System is mainly based on 360 degree, Rashi, Nakshatra ..based System.


Even if Vedic Astro also calculate 360 degree via 16 Sodash kunali. And all K.P. rules Based and extension about Vedic Astro. 


Calculate All method independently and combindely too, will get result in most accurrate.

MAANGLIK

 


Sun, Moon, Ascendant three 'lagna' has been considered in this view where mars is placed from thier lagna.

If minimum two condition fulfill mars position from lagna position to 1, 4, 7, 8, 12th house called Maanglik dosha. IF ALL THREE LAGNA & MARS POSITION ARE IN THUS POSITION CALLED GHOR MAANGLIK.

One other view also runs widely, if Mars are 1, 4, 7  8, 12 position from ascendant it is lonely to confirm to declare maanglik dosha.

So when calculate & declare maanglik dosha clear this conflict also that all the methods are widely spreader in this purpose or view.

Sunday, December 15, 2024

INDIA : MOON DASHA

 


Moon Mahadasha : 
१० sep २०१५ to १० sep २०२५

Moon denotes mental status and with many planets so nation will suffer mixed mental status

Moon in ३rd house in own rashi, 
Third house is upachay house so.. 
Mixed results to nation
But finaly will win all the battle
Third house is vyaya-expenses
/१२th house of ४th house and ४th indicator of public and lands so public will suffer and land controversy will arise in this mahadasha.

Moon Mahadasha Saturn anterdasha running till १० dec २०१९ to  ११ july २०२1
Result : 

Worries & Sadness to nation

Will win over all obstacles

Sad news from Bollywood

Border controversy

THE PREDICTED ANALYSIS : INDIA's prediction

 India Kundli

-Amit Kumar Naynan

  In India lagna chart Rahu is in Taurus and Ketu in Scorpio officially as 180 degree far cum in front of each other
  In Sep 2020 Rahu will enter in Taurus cum Ketu will enter in Scorpio with their reguler motion same day same time. Both will run one and half year approx in these rashis.
  Rahu in lagna in extaled/uchcha Rashi Taurus will present stable strength for India with unexpected great personality. But is seeing fifth and ninth house so it shows danger for famous personality in these days. When Mars will run through gemini in next year will aspect fifth house too then danger will more. So India will rule but should aware about sudden accidental cases.

  


ASTRO



In Astro Science, One Horoscope is A Time equation about Universal effect as previously said and Universal effect comes in view through All Universal Factors. 

9 Planets, 27 nakshatras commonly calculated but 12 Planets and 28 Nak including Abhijit should also calculate for micro readings even if they additional planet or nakshatras does not rule dasha but effect UNDOUGHTLY. Thus for more micro readings should attend 88 nakshatras also including 27 or 28 nakshatras among them. 88 nearest nakshatras are most effecting including rashi chakra even if 27 nakshatras rules dasha via Moon gocher a geography subplanet but in astro as planet mentioned. What is the relation between moon and 27 nakshatras that they hold Dashachakras or Periods about lifetime is unknown till date but interesting to see that maximum prediction goes and comes accurrate through these dasha. It is interesting*


PREDICTIONS*


TG @ THE GOD @ THE GREAT GOD

PLANET POSITION ON FACEBOOK


Kundali position

Leak @ Project k @ Kalki 2898 AD

Astronomy ke anusaar kisi bhi kundali ke planet se uske kisi bhi main event day ke planet specialy main lagna kundali, Bhava/niryana bhav, navmansha se match karte hain. is base par hi vishwa ke tamaam kundali prediction kie jate hain. may see and match.

compare with

Teasor announcement 20:07:2023

Prior release date 12:01:2024

Second release date 09:05:2024



EXAMPLE

INDO+CHINA


INDIA


COMMUNIST CHINA




  *KUNDALI/HOROSCOPE OF COMMUNIST CHINA HAS BEEN TOLD SINCE CHINA'S ORIGINAL HOROSCOPE (OR ORIGINAL INDEPENDENT TIME AS INDIA) IS NOT PRESENT ANYWHERE SO WHEN COMMUNIST GOVERMENT TOOK COMMAND TO RULE NATION OF CHINA THE TIME OF COMMUNIST CHINA BORN STATED 


*India will going through good period specialy for wealth, economy, Travel, Power, communication, game, cinema, entertainment so on till 2022.

*Even if Indo China war not in recently in war shape but China may suffer from economy, business, other problems till 2022 specialy. May arise problem also during Sep to Oct 2021. So little controversy from India or with others indicates in period.


RELEVANT LINK


INDIA & CHINA


 https://sheetanshukumarsahaykaamrit.blogspot.com/p/vayara.html?m=0

VASTU-CHAKRAM




Saturday, December 14, 2024

VASTU


 
VASTU EFFECTS 50% DASHA EFFECT, IT HAS BEEN SAID VERBLY !
SINCE IN A PLACE MANY PERSONS LIVE AND EVERYONE HAS OWN DASHA AND DASHA EFFECTS, SO THEY LIVE LIFE ACCORDINGLY THAT FEATURES !
BUT VASTU ARE ALSO CONNECTED WITH IT: SO GET POSITIVE MANNER DASHA EFFECTS MAXIMUM WE SHOULD FOLLOW ASTRO RULES !  

PM MODI THIRD TERM

THE PREDICTED ANAYSIS



[ OATH ]


 https://www.youtube.com/watch?v=PJnHYeyegk8

RASHI NAKSHTRA UPANAKSHATRA PUJAN

 

THE PREDICTED ANALYSIS





THE PREDICTED ANALYSIS

[ 1 ]




IT IS THE ONE OF THE MOST ACCURRATE PREDICTION THAT HAS BEEN PREDICT.
IT BECOME ALMOST 100% ACCURRATE.

WHEN IT HAD BEEN PREDICTED THERE WAS MR NITISH KUMAR ONLY CHOICE FOR CM AND THERE WAS NO ONE IN RACE, 
BUT IT BECOME FROM HIS OWN PARTY ALLIANCE BY EXEPTION NIETHER JDU NOR BJP, CAME FROM HAM JEETAN RAM MANJHI
AND
MOST INTERESTING THING '
THAT
MR JEETAN RAM MANJHI WAS NEVER IN KNOWN FACE AS REGULER POLITICIAN
NIETHER
HE HAD PROPOSED OR OPPOSED OR DEMANDED SUCH TYPE DEMAND CM SEAT,
THERE WERE NOT PREVIOUS CONFLICTS,
IN ANY MANNER AND ON ANY MATTER.
BUT
MR NITISH KUMAR LEFT HIS CM SEAT BY HIS WILL 
AND
ANNOUNCED/GRANTED THE CM POST TO MR JEETAN RAM MANJHI:

IT WAS A GREAT SURPRIZE FOR MR JEETAN RAM MANJHI,
IT WAS JUST LIKE MR DEVGOUDA NAME FOR PM,
WHEN
HE WAS ANNOUNCED FOR IT
AND
HE WAS NOT IN SUCH TYPE RACE EVER'
BY DEMAND OR BY WILL TOO !

THUS WHAT HAPPENED MAY SEE;
READ ARTICLE CAREFULLY
AND
SEE THE ASTRO AND PLANET' S MIRACLE !!  


SAMRAAT


                                       


SUN & MOON ARE ROYAL PLANETS
MOON & SATURN ARE RELATED TO PUBLIC
MOON INDICATES MASS + CHILD & FEMALES
SATURN BASIC PEOPLE 
4TH HOUSE FOR PUBLIC AND 10TH HOUSE FOR POSITION AND 11TH FOR FULFILL OF DESIRE*



Wednesday, December 11, 2024

MULTIPLE PERSONALITY

  


*According to Astro Method when Lagna is influenced  or attached by Saturn and Mercury One has dual characterism. If it also effects Sun and Moon lagna in any manner influence becomes large. If it all lagna becomes in Dual rashis = Gemini/Mithun, Kanya/Virgo, Dhanu/Sagitarious,Meena/Pisces; Above results come in more powerful effect. 

Saturn is called master of duplicate and Mercury is called dual matured so bahurupiya charitra @ multiple faces cum multiple activities comes arise in one's s personality. Dual Rashis add more flavour in dual effects.

अबकि बार फिर नितीश कुमार शपथ-ग्रहण

कर शपथ कर शपथ कर शपथ शपथ - ग्रहण 20.11.2025 11.37 सुबह,पटना लग्नेश/ग्रह-नक्षत्र-उपनक्षत्र : उपनक्षत्र का नक्षत्र लग्न मकर : शनि-चंद्र-शुक्र ...