अखंड भारत की बुलंद तस्वीर विभिन्न और विविध सभ्यता और संस्कृति का संगम है । सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा सिर्फ हिंदुस्तान नहीं बल्कि अपने आप में सारा जहां सारा जहान है । भारत की मिट्टी की यह खुशबू है कि दुनिया के अलग-अलग भागो से लोग खींचे चले आते हैं और/मगर फिर यहीं के होकर रह जाते हैं । इसका उदाहरण अनार्य की भूमि में आर्य का आना और बसना, इसी प्रकार कालांतर में सिकंदर, मुगल, अंग्रेजों आदि का आना और इसकी सभ्यता और संस्कृति का होना या फिर इसका मुरीद हो जाना है । वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से रचित और संचित इस भूमि की यही वैश्विक विशेषता है जिसमे समस्त विश्व को परिवार की तरह अपना बना लेने की अद्भुत क्षमता है और यही इसकी सभ्यता बनाम संस्कृति की अनोखी विलक्षण ताकत है ।
भौगोलिक स्तर पर भी भारत विभिन्न व विविध स्तर पर अनोखा है और तमाम तरह के प्राकृतिक सौंदर्य से सम्पूर्ण है । प्राकृतिक संपदा के मामले में भी यही भूमि विलक्षण है और इस भूमि का कोई भी क्षेत्र बंजर होकर भी बंजर नहीं है क्योंकि वह या तो भौगोलिक दृस्टिकोण से सुंदर है या फिर वह अन्य भौगोलिक संपदा नदी, जंगल, पहाड़, पठार, रेगिस्तान, खान आदि से परिपूर्ण है ।
पूरब में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर, उतर में हिमालय, दक्षिण में हिंद महासागर के रूप में इसके बाॅर्डर लाइन तक प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण और सम्पूर्ण हैं । कहने को तो भारत एक प्रायद्वीप है मगर इसकी समस्त दिशाएं राष्ट्र के सीमा से बाहर भी प्राकृतिक सौंदर्य से सम्पूर्ण हैं ।
भारत की सभ्यता और संस्कृति इतनी रोमांचक है कि इसके विभिन, विविध, विचित्र सौंदर्य से कोई भी अछूता नहीं रह सकता । मैदानी, रेगिस्तानी, पहाड़ी, बर्फीली, जंगली, नदी घाटी सभ्यता आदि ऐसे अप्रतिम विविध उदाहरण हैं जो हरेक में अपने आप में विविध संस्कृति को आत्मसात किए हैं । इतना ही नहीं यहां हर सभ्यता और संस्कृति व उसके अंदर विविध आचार-व्यवहार, भाषाओं के इतने रंग भरे हैं कि आप इसकी सार्वकालिक और सार्वभौमिक रंगीन पहचान और विरासत को इसी दश में महसूस कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि वसुधैव कुटुम्बकम का नारा यहां से विश्व के लिए यूं ही नहीं विश्वव्यापी हुआ।
भारत ऐसा देश सम्पूर्ण दुनिया में कहीं नहीं है । इसे सामान्य अर्थों में देखना, सुनना, समझना आदि शायद अतिशयोक्ति लगे मगर जब आप दुनिया के किसी भी देश का इतिहास और वर्तमान उठाकर देखेंगे तो पाएंगे कि सम्पूर्ण दुनिया में किसी भी देश में इतनी सम्पूर्ण विभिन्नता, विविधता, विचित्रता कहीं नहीं है । अगर वह किसी एक मामले में सम्पूर्ण है तो किसी दूसरे मामले में अपूर्ण है । इसे आप स्वयं ही स्वयं जज कर सकते हैं ।
भारत वास्तव में एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है जिसे एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है । इसे आप लोगो की कमअक्ली, अज्ञानता, अल्प ज्ञान, अधूरा ज्ञान आदि के अलावे वर्सों की गुलाम मानसिकता, विस्मृत अतीत आदि के साथ वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक आदि कारणों के कारण जान सकते हैं । अरसों की गुलाम मानसिकता के कारण भारत अपनी पंथनिरपेक्ष पहचान को भूल गया है और स्वार्थी, राजनीतिक आदि लोग अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए इसे धर्मनिरपेक्ष पहचान बता इसे जाति और धर्म के आधार पर बांटने का गंदा खेल खेलते हैं और खेल रहे हैं, इस कारण कुछ स्वार्थी तत्व हमारे अज्ञान का फायदा अपनी लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं । इस प्रकार यह पंथनिरपेक्ष राष्ट्र इस वक्त जनता की नजर में भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना है । आज हालात यह है कि लोग धर्मनिरपेक्ष का मतलब तो जानते हैं मगर पंथनिरपेक्ष का मतलब तक नहीं जानते । पंथ यानि जाति और धर्म से उपर कर्म आदि जीवन मूल्यों के आधार पर बगैर किसी भेद-भाव के तैयार की गई एक व्यवस्था जहां जाति और धर्म के नाम तक की कोई पहचान नहीं है । अलबत्ता बाद में इसमे पनपी वंशागत आदि कुरीति ने इसे धर्मनिरपेक्ष के बाद जाति और धर्मआधारगत बनाने में भी अपनी कोई कसर नहीं छोड़ी, यह भी उतना ही सच है । अलबत्ता इससे पंथनिरपेक्ष सता का महत्व कम नहीं हो जाता जो धर्मनिरपेक्ष से उपर है और धर्मनिरपेक्ष जाति और धर्म से उपर । क्योंकि कुरीति या कुव्यवस्था तो किसी भी व्यवस्था आदि को अपभ्रंषित करने में सक्षम है तो इसमे गलती व्यवस्था की नहीं बल्कि उनके संचालकों की होती है । क्योंकि कोई भी व्यवस्था अपने आप में जीवित वस्तु नहीं है, यह जीवित और चलित ही अपने संचालकों द्वारा होती है अलबत्ता व्यवस्था के अपने नियम और कानून होते हैं जिसके कारण व्यवस्था का अस्तित्व होता है और उसके पालन व संचालन के द्वारा संचालकोें का अस्तित्वहोता है । अगर वह संचालक अपने दायित्व का पालन नहीं करते और व्यवस्था के मूलभूत सिधांत से इतर अपने नियम और कानून थोप देते हैं तो वह व्यवस्था अपनी मूलभूत व्यवस्था नहीं रह जाती और अपभ्रंषित होने लगती है । इस प्रकार वह व्यवस्था के अस्तित्व को ही मिटा डाल वास्तव में व्यवस्था के संचालक न होकर उसके आत्महंता आत्मघाती रूप होते हैं जो ऐसे कई कालजयी व्यवस्था को बर्बाद करने में सक्षम होते हैं । ऐसे में हमे जरूरत होती है उस कालजयी व्यवस्था को याद रखने की और उन्हें भी याद रखने की जिन्होंने व्यवस्था का हुक्मराज होने की आड़ में व्यवस्था का ही खात्मा कर दिया । यह इतिहास के सबक ही कालांतर में व्यवस्था के पुनर्जन्म पुनर्व्यवस्था के समय चाहे वह व्यवस्था नए रूप या नए नाम के साथ ही क्यूँ न आए, सबल भविष्य का आधार होते हैं ।
अलबत्ता हमारे संविधान में भारत को एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में ही इसे पूर्ण राष्ट्र का दर्जा दिया गया है और यह भारतीय संविधान के आरंभ में ही लिखा है ।
भारतवर्ष का बरसों का इतिहास केवल बरसों का नहीं बल्कि बरसों बरस का है । इसे एक आदिकालीन गौरवशाली सभ्यता और संस्कृति माना जाना है । श्रृषि-मुनियों की परंपरा का केंद्र-बिंदु तो आध्यात्म और योग का जन्मदाता और धनी राष्ट्र और भूमि भी माना जाता है इसे । एक प्रकार से यह राष्ट्र यह भूमि सिर्फ राष्ट्र और भूमि नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा है । यह विश्व इतिहास की अतिआदि एवं आदिकालीन धरोहर है तो वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा के चलते विश्व सभ्यता और संस्कृति को आत्मसात करने का अतिआदिकालीन आदिकालीन साक्ष्य और प्रमाण भी है ।
राज्य
बिहार 22.03.1912 & 1950
पश्चिम बंगाल 15.08.1947 & 1950
उड़ीसा 01.04.1936 & 1950
उतकला दिबस ( उड़ीसा ) Utakala dibasa 01.04.1936
छत्तीसगढ़ 01.11.2000
झारखंड 15.11.2000
उतर प्रदेश 24.01.1950
उतराखंड 09.11.2000
मध्य प्रदेश 01.11.1956
पंजाब 01.11.1966
राजस्थान 30.03.1949
महाराष्ट्र 01.05.1960
तमिलनाडु 01.11.1956
कर्नाटक ( as मैसूर) 01.11.1956
कर्नाटक (नाम) 1973
केरल 01.11.1956
आंध्र प्रदेश 01.11.1953
स्टेट ऑफ आसाम (आसाम) 26.01.1950
आसाम (नाम) : स्टेट ऑफ आसाम : विभाजन : 21.01.1972
सिक्किम 16.05.1975
गुजरात 01.05.1960
जम्मू-कश्मीर 26-27.10.1947
अरूणाचल प्रदेश 20.02.1987
लद्दाख 1959 (जम्मू-कश्मीर हिस्सा),
लद्दाख 31.10.2019 as केंद्रशासित+
नागालैंड 01.12.1963
हरियाणा 01.11.1966
हिमाचल प्रदेश 1971
त्रिपुरा 21.01.1972
मनीपुर 21.01.1972
मेघालय 21.01.1972
मिजोरम 20.02.1987
तेलंगाना 02.06.2014
केंद्रशासित राज्य
अंडमान निकोबार 01.11.1956
गोवा 30.05.1987
पांडिचेरी 01.11.1954
जम्मू-कश्मीर 05.08.2019 ( घोषित ) 31.10.2019 ( प्रभावी )
लद्दाख 05.08.2019 ( घोषित ) 31.10.2019 ( प्रभावी )
दमन व दीव 26.11.2019 ( घोषित ) 26.01.2020 ( प्रभावी )
अधिकृत क्षेत्र
पाक अधिकृत कश्मीर 1948 शनि-शनि
चीन अधिकृत तिब्बत 1962 शनि-राहु
आदि भारत के वर्तमान भारत से इतर वर्तमान राष्ट्र
बर्मा : म्यामांर 01.04.1937 भारत भूमि से स्वतंत्र गुलाम देश
बर्मा : म्यामांर 04.01.1948 एक स्वतंत्र राष्ट्र शनि-शनि
पाकिस्तान 14.08.1947
अफगानिस्तान 19.08.1919
तिब्बत 1962 शनि-राहु
प्रमुख घटनाएँ
19.01.1990: कश्मीर पंडितों का कश्मीर से विस्थापन शुक्र- शुक्र
26.11.2008: बंबई गेटवे आफ इंडिया होटल पर हमला शुक्र-केतु
भारत विलय
भारत विलय: जम्मू- कश्मीर 26.10.1947 हस्ताक्षर
27.10.1947 से प्रभावी
भारत विलय: अंडमान निकोबार 01.11.1956
गोवा पुर्तगाली शासनकाल: 1510 - 19.12.1961
भारत विलय: सिक्किम 16.05.1975
भारत विलय: पांडिचेरी 01.11.1954
भारत बनाम युद्ध
युद्ध वर्ष दशा-अंतर्दशा
पाकिस्तान 1 : 26-27.10.1947 कश्मीर विजय : शनि-शनि
गोवा 19.12.1961 8.30 गोवा विजय : शनि-राहु
दमन 19.12.1961 दमन विजय : शनि-राहु
दीव 19.12.1961 दीव विजय : शनि-राहु
चीन हमला 1962 भारत विभाजन: शनि-राहु
तिब्बत 1962 तिब्बत गुलाम : शनि-राहु
लद्दाख 1962 लद्दाख विलय : शनि-राहु
पाकिस्तान : युद्ध : 1965 : अप्रैल -सितम्बर : भारत विजय : शनि-वृहस्पति से बुध-बुध्
पाकिस्तान : युद्ध : 26.03.1971 बांग्लादेश की मांग शुरु : बुद्ध-शुक्रौ
देश : युद्ध : 16.12.1971 पाकिस्तान पर जीत : बुद्ध-सूर्य
बांग्लादेश : वर्तमान 16.12.1972 बांग्लादश निर्माण बुध-चंद्र
पाकिस्तान 4 युद्ध : 1989 पाक अधिकृत कश्मीर/कश्मीरी पंडित विस्थापन केतु-बुध
पाकिस्तान 5 युद्ध : 1999 मई -जुलाई कारगिल विजय शुक्र- राहु/वृहस्पति
मुख्य घटना : राष्ट्र
महात्मा गांधी मृत्यु: हत्या 30.01.1948 शनि-शनि
लालबहादुर शास्त्री मृत्यु ( संदेहास्पद ) 11.11.1966 बुद्ध-बुद्ध
इंदिरा गांधी मृत्यु: हत्या 31.10.1984 केतु-चंद्र/मंगल
राजीव गांधी मृत्यु : 21.05.1991 शुक्र-शुक्र
संजय गांधी मृत्यु: दुर्घटना ( संदेहास्पद ) 23.06.1980 बुद्ध-शनि
सुभाषचंद्र बोस मृत्यु ( संदेहास्पद ) 18.08.1945/1986 केतु-राहु/वृहस्पति
समूह
हिंदू-मुस्लिम दंगा 1947 शनि-शनि
हिंदू-सिक्ख दंगा 1984 केतु- चंद्र/मंगल
बम्बई बम विस्फोट कांड : द. -प. भारत 12.03.1993
बाबरी मस्जिद कांड : मध्य : 06.12.1992
गोधरा कांड : पश्चिम : 27.02.2002
कश्मीर: कश्मीरी हिंदू पलायन : उत्तर-पश्चिम : 1991
मुंबई हमला : दक्षिण-पश्चिम : 26.11.2008
भारत बनाम युद्ध
पाकिस्तान हमला 1947 कश्मीर विजय शनि-शनि
चीन हमला 1962 भारत विभाजन शनि-राहु/वृहस्पति
तिब्बत 1962 तिब्बत गुलाम शनि-राहु/वृहस्पति
पाकिस्तान हमला 1971 पाकिस्तान विभाजन बुध-सूर्य
बांग्लादेश 1972 बांग्लादेश निर्माण बुध-सूर्य
पाकिस्तान हमला 1989 पाक अधिकृत कश्मीर केतु-बुध
पाकिस्तान हमला 1999 कारगिल विजय शुक्र-राहु
भारत बनाम युद्ध
पाकिस्तान हमला 1947 कश्मीर विजय : शनि-शनि
चीन हमला1962 भारत विभाजन : शनि-राहु
तिब्बत 1962 तिब्बत गुलाम : शनि-राहु
पाकिस्तान हमला 1972 पाकिस्तान विभाजन : बुध-सूर्य/चंद्र
बांग्लादेश 1972 बांग्लादेश निर्माण :ः बुध- सूर्य/चंद
पाकिस्तान हमला 1989 पाक अधिकृत कश्मीर : केतु-बु/ शुक्र-शुक्र
पाकिस्तान हमला 1999 कारगिल विजय : शुक्र-राहु/वृह.


















