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Thursday, December 19, 2024

BHAARAT

भारत

आदि भारत

भारत क्या है ? एक राष्ट्र ! एक भूखंड ! एक जनसता ! एक सभ्यता ! एक संस्कृति ! यह सबकुछ है । भारत ! भरत का भारत ! आर्यावर्त ! आर्य का आर्यावर्त ! सिंधु का सिंधुस्तान बनाम हिंदू का हिंदुस्तान ! भारत बनाम इंडिया !

आदि भारत निःसंदेह आर्यों का आर्यावर्त बनाम भरत के भारत को माना जा सकता है । क्योंकि भारत के सर्वप्रथम मूल निवासी अनार्य जो कि सम्पूर्ण भारत में फैले थे कालांतर में अधिकांश दक्षिण भारत में बस गए और मध्य-पूर्व एशिया से आए आर्य उत्तर भारत में आए तथा भरत के नाम पर भारत राष्ट्र का नामकरण हुआ । उस वक्त भी भारत की कुंडली हस्तिनापुर बनाम आज की पुरानी दिल्ली थी । महाभारत काल के अनुसार गांधारी अफगानिस्तान के कांधार से थी, इस प्रकार भारत का अफगानिस्तान से तात्कालिक जुड़ाव भी  स्पष्ट होता है । यद्यपि आदि भारत की कोई प्रामाणिक् कुंडली उपलब्ध नहीं है, फिर भी कहा जाता है कि भारत की आदि राशि मकर है ।

आदि भारत : नवयुग

अपितु सम्राट अशोक का काल जबतक था तबतक आदि भारत की विशालतम तस्वीर लगभग यही नजर आती है । यद्यपि अलग-अलग काल में कई बार इसका विखंडन व योग होता रहा है और इसके बावजूद सम्राट अशोक काल तक यह अपने आदिकालीन रूप में मौजूद रही या पुनर््थापित हुई । सम्राट अशोक के काल तक बर्मा से अफगानिस्तान तक भारत की तस्वीर स्पष्ट नजर आती है । इस काल में भारत की राजधानी का केंद्र मगध साम्राज्य का केंद्र राजगृह वर्तमान राजगीर से बदलकर तात्कालिक कुसुमपुर बनाम पाटलिपुत्र बनाम आज का पटना : बिहार अवश्य बना । वर्तमानकाल के सबसे पुरातन काल जिसमे भारत अपने विशालतम रूप में था अशोक काल ही था । इस काल में बर्मा और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्र भारत का हिस्सा थे । इस भारत की कुंडली मौजूद नहीं है ।

आदि भारत : विखंडन और दासता

उसके बाद भारत का विखंडन और दासता का दौर शुरू हुआ ।अशोक काल के बाद के राष्ट्र के संचालक अक्षम थे, विदेसी आक्रमण व अन्यान्य कारण से राष्ट्र विखंडन व दासता का दौर शुरू हुआ जिसमे मुगल दौर व अंग्रेजी दौर का आगमन हुआ । अंग्रेजी दौर में कलकता को भारत की राजधानी होने का गौरव अवश्य प्रदान हुआ । इस भारत की कुंडली भी मौजूद नहीं है ।

सम्पूर्ण भारत

सम्पूर्ण भारत का साम्राज्य तिब्बत के पठार से अफगानिस्तान के सम्पूर्ण क्षेत्र सह सिंधु घाटी सभ्यता क्षेत्र सह बर्मा के साथ वर्तमान सम्पूर्ण भारत तक आता है । अलबत्ता यह अलग बात है कि आज के दौर में इनमे से कई भूखंड विखंडित, दासता या स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हैं ।

आदि भारत : सारां

भारत का भूखंड आजादी से पूर्व आज का बर्मा, बांग्लादे, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत यह सभी भारत का हिस्सा ही तो थे जो आज स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में  विश्वपटल पर विद्यमान हैं ।

अखंड  भारत

अखंड भारत में आज का बर्मा, बांग्लादे, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत यह सभी भारत का हिस्सा थे । आज भारत के अभिन्न भाग स्वतंत्रता से गुलामी के चरणबद्ध काल में अलग देशों का कारण बन गए ।

सम्पूर्ण भारत

उतर से दक्षिण भारत                                महाभारत काल, भरत काल

भारत से तिब्बत तक                                महाभारत काल, भरत काल

भारत से अफगानिस्तान तक                    महाभारत काल से अशोक काल पूर्व तक

भारत से बर्मा: म्यांमार तक                       सम्राट अशोक काल से मुगल पूर्व तक

वर्तमान भारत                                          मुगल काल

वर्तमान भारत                                          अंग्रेज काल

भारत विभाजन

भारत विभाजन: अफगानिस्तान            19.08.1919

भारत विभाजन: बर्मा -म्यांमार 01.04.1937 भारत भूमि से स्वतंत्र कर गुलाम दे      

                                                        04.01.1948 एक स्वतंत्र राष्ट्र नि-नि

भारत विभाजन: पाकिस्तान         14.08.1947 : नि-नि

भारत विभाजन: तिब्बत 1962 : नि-राहु

आदि भारत पुनर्विलय

आदि भारत पुर्नविलय: जम्मू-कश्मीर 26-27.10. 1947 : नि-नि

आदि भारत में पुनर्विलय: गोवा 19.12.1961  8.30 सायं : नि-राहु

आदि भारत में पुनर्विलय: दमन 1912.1961  8.30 सायं : नि-राहु

आदि भारत में पुनर्विलय: दीव 19.12.1961  8.30 सायं : नि-राहु

आदि भारत में विलय: सिक्किम            16.05.1975 : बुध-मंगल

आदि भारत में विलय: लद्दाख                1962 : नि-राहु

स्वतंत्र भारत में विलय

अंग्रेज भारत शासन काल: ईस्ट इंडिया शासन - अंग्रेजी शासन

अंग्रेजी शासन - स्वतंत्रता दिवस         15.08.1947 शनि-शनि

भारत विलय: जम्मू-कश्मीर             22.10.1947: नि-नि

                                                 25.10.1947: शनि-नि

भारत विलय: जम्मू-कश्मीर            26.10.1947 SIGNED : नि-नि

                                               27.10.1947 प्रभावी : नि-नि

31.10.2019 00.00 रात्रि as new teritory चंद्र-शनि

भारत विलय: अंडमान निकोबार    01.11.1956: नि-सूर्य

गोवा पुर्तगाली शासन काल:             1510 - 19.12.1961: नि-राहु

भारत विलय: गोवा             19.12.1961 8.30 रात्रि : नि-राहु

भारत विलय: दमन             19.12.1961 : नि-राहु

भारत विलय: दीव             19.12.1961: नि-राहु

भारत विलय: लद्दाख             1962: नि-राहु

भारत विलय: सिक्किम             16.05.1975: बुध-राहु

भारत विलय: पांडिचेरी                    01.11.1954 नि-शुक्र

                                                  1956 नि-सूर्य/चंद्र

                                                 16.08.1962 फ्रांस admit & confirm* नि-राहु

भारत में पुनर्विलय

भारत में पुनर्विलय: जम्मू-कश्मीर 26-27.10.1947: नि-नि

भारत विलय: पांडिचेरी                    01.11.1954 नि-शुक्र

                                                  1956 नि-सूर्य/चंद्र

                                                 16.08.1962 फ्रांस admit & confirm* नि-राहु

भारत में पुनर्विलय: अंडमान निकोबार 01.11.1956: नि-सूर्य

आदिकालीन भारत की सभ्यता व संस्कृति समस्त विश्व पर व राष्ट्र का क्षेत्र भरत के भारत बनाम आर्य का आर्यावर्त सिंधु घाटी सभ्यता से अफगानिस्तान से संपूर्ण आज का आजादी के समय का भारत था ।

सम्राट अशोक के काल तक भारत की सत्ता बर्मा बनाम आज के म्यामांर से अफगानिस्तान तक थी ।

गुलाम भारत

अखंड भारत की क्ति को अंग्रेजी सल्तनत ने कालक्रम में बर्मा बनाम म्यामांर के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बनाया । फिर जाते-जाते भारत के एक और टुकड़े कर पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र बनाया ।

स्वतंत्र भारत

अखंड भारत में से बर्मा, पाकिस्तान के विभाजित हो जाने के बाद अरसों की गुलामी से निकलकर अपने पैरों पर खड़ा हो रहे भारत पर उसके सबसे विश्वासी मित्र ने विश्व इतिहास के सबसे बड़े विश्वासघाती गद्दार के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराते तिब्बत को हथिया लिया । यह दीगर बात है कि यह भेड़िया बनाम इस भेड़िया की औकात अंग्रेजों के शासनकाल में एक कुते की ऐसी भूंकने तक की भी नहीं थी । आप सदा एक शत्रु का सम्मान कर सकते हैं मगर एक गद्दार का नहीं ।

भारत में विलय

जम्मू-कश्मीर को कुछ दिनो के लिए अंग्रेजों से भारत को आजाद कर उसे भारत का हिस्सा प्रदान करने से वंचित तो नहीं किया मगर उसका अधिकार अपने पास रखा । इसका अधिकार उसके बाद जम्मू-कश्मीर जन्म के साथ भारत को मिला । इस प्रकार आदि भारत में जम्मू-कश्मीर विभाजन व विलय दोनो का अंतराल माना जा सकता है । 

इसमे शक नहीं कि स्वतंत्रता पूर्व जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान की भांति ही भारत का अभिन्न अंग था । मगर स्वतंत्र भारत का जन्म जम्मू-कश्मीर के बगैर हुआ था । इसका अधिकार भारत के तात्कालीन अंग्रेजी शासक ने अपने पास रखा और उसे अपने अधीन भी रखा। इस प्रकार आदि भारत की कुंडली में या के अनुसार जम्मू-कश्मीर भारत से कभी विभाजित हुआ ही नहीं । अलबत्ता स्वतंत्र भारत का जन्म चूँकि इसके बगैर हुआ अतः कहा जा सकता है कि आदि भारत का मुख्य भूखंड आजाद हो गया मगर उसके कुछ भूखंड आजाद होने बाकि रह गए । उसमे कुछ स्वतंत्र राष्ट्र बने । मगर जम्मू-कश्मीर कभी न आजाद हुआ न स्वतंत्र राष्ट्र बना बल्कि सदा की भांति आदि भारत का अंग रहा । स्वतंत्र भारत में जम्मू-कश्मीर का आना आदि भारत में जम्मू-कश्मीर का पुनर्विलय भी नहीं बल्कि स्वतंत्रता का अभिप्राय माना जाएगा । आदि भारत का एक आदि भूखंड स्वतंत्र हुआ और आदि भारत के ही एक नवभूभाग राष्ट्र भारत का कुछ दिनों बाद कालांतर में भाग बना । इस प्रकार इसे आदिकालीन भारत का स्वतंत्र भारत में रूपांतरण माना जाएगा । जिस प्रकार किसी राष्ट्र के राज्य की सीमाएं अपनी अंदरूनी सीमागत या सतात्मक इत्यादि मामले में अपना स्वरूपांतरण व हस्तांतरण करती रहती हैं ।

स्वतंत्र भारत भूखंड आकलन

अखंड व गुलाम भारत ने आजादी से पूर्व पाकिस्तान और भारत की आजादी के बाद भारत ने तिब्बत का भूखंड खोया । इस प्रकार आजाद भारत में भारत ने एकमात्र सबसे बड़ी भूखंड त्रासदी तिब्बत की झेली । जबकि इसके हिस्से में जम्मू-कश्मीर विलय, गोवा विलय, सिक्किम विलय सहित लददाख विलय जैसी उपलब्धियां भी आईं । 

भारत भविष्य

अखंड भारत या गुलाम भारत की कोई कुंडली नहीं है अतः इस भूखंड के सबसे नए भाग स्वतंत्र भारत की कुंडली से वर्तमान भारत का भविष्यफल निकालना सही रहेगा ।

भारत और जम्मू-कश्मीर

भारत की आजादी के समय में भारत के जन्म से पहले पाकिस्तान का जन्म हुआ जबकि भूखंड एक ही था । भारत की आजादी के साथ अभिन्न जम्मू-कश्मीर उस अखंड भूखंड का हिस्सा भारत को मिला जो भारत गुलाम भारत से आजाद भारत के रूप में साथ आजाद हुआ । अपितु जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक दस्तावेज व स्वतंत्रता आदि का काल 27 अक्टूबर 1947 है । यद्यपि राजा हरिसिंह ने 26 तारीख को दस्तखत कर दिए थे फिर भी यह 27 तारीख से प्रभावी-इफेक्टेड हुआ था । इस प्रकार दोनो तिथि की महता है । आरंभिक तिथि चूंकि 8 मूलांक है इसलिए यह भारत के फेवर में है जबकि इसका इफेक्टेड होना 9 मूलांक है इसलिए इस सत्ता को लेकर शासकीय समस्या बनी रहेगी ।

भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसकी राशि कर्क है जबकि जम्मू-कश्मीर का जन्म कर्क लग्न और मीन राशि में हुआ है । कर्क लग्न चूंकि भारत का तृतीय भाव है अतः भारत की भूमि का व्ययस्थान होने के कारण भूमि का यह क्षेत्र बनाम भूखंड भारत के लिए आरंभ से ही परेषानियों का सबब बना है । इसके अतिरिक्त भारत का जन्म मूलांक 6 है जबकि कश्मीर का जन्म मूलांक 9 है जो कि दोनो परस्पर एक-दूसरे के शत्रु हैं । इसके अलावे भारत का संविधान सह गणतंत्र दिवस 26 जनवरी होने के कारण मूलांक 8 है यह भी कश्मीर के जन्म मूलांक का शत्रु है अपितु दोनो अंकों में परस्पर शत्रुता है । ऐसे में भारत का इस भूखंड को लेकर समस्याग्रस्त होना भौगोलिक, सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक आदि स्तर पर स्पष्ट रूप से स्पष्ट होता है ।

जम्मू-कश्मीर की जन्मकुंडली में लग्न में मंगल व नि का होना जो कि यूं भी शुभ नहीं माना जाता क्योंकि दोनो ग्रहों में परस्पर सौम्यता नहीं है, उसपर भी नीच के मंगल के साथ त्रुगत नि का होना इसका और भी उग्र व विवादित होना स्पष्ट करता है । कश्मीर की कुंडली कर्क लग्न और मीन राशि की है । लग्नेष चन्द्र मीन राशि में नवम में स्थित हैं यद्यपि भाव में अष्टम में है और चन्द्रेश बनाम राशीश वृहस्पति वृश्चिक में पंचम में यद्यपि भाव में चतुर्थ में है । कर्क लग्नस्थ मंगल और नि लग्न व भाव दोनो के अनुसार लग्न में हैं । सूर्य, शुक्र और बुध तुला में हैं जबकि वृहस्पति, केतु वृश्चिक में हैं व राहु वृष में हैं यद्यपि भाव में वृहस्पति, केतु चतुर्थ और राहु दम में हैं । कर्क लग्न में नीच के मंगल और मारकेश नि का परस्पर त्रु ग्रह के रूप में लग्न व भाव लग्न दोनो के अनुसार ही लग्न में होना इसके हमेशा बाधाग्रस्त रहने का सूचक है । मंगल के कारण स्थिति उग्र तथापि नि के कारण रणनीतिक व कूटनीतिक भी होगी । लग्नेश का अष्टम मृत्यु भाव में होना भी इसके लिए शुभ नहीं हैं । शायद यही कारण है कि कश्मीर का एक हिस्सा विखंडित हो पाक के कब्जे में भी है जिसे हम पाक अधिकृत कश्मीर के रूप में जानते हैं ।

भारत और राज्य

भारत के अलग-अलग राज्यों की जन्मकुंडली अलग-अलग है अतः ऐसे में आजादी के बाद एक और भूखंड का आधिकारिक विलय होने से ज्यादा फर्क नहीं पर्डेगा । विविध राज्यों के साथ भारत के संबंधों आदि की समीक्षा के लिए राष्ट्र व राज्य की परस्पर कुंडली आदि का परस्पर अध्ययन अनिवार्य है । क्योंकि किसी भी राष्ट्र में कई बार कई भूखंड युग्म तो कई विभाजित तो कई पुनर्विलय हो जाते हैं । मसलन भारत की आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर, गोवा जैसे भूखंड का विलय हुआ तो कश्मीर व तिब्बत जैसे भूखंड का पाक व चीन द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर, चीन अधिकृत तिब्बत में विभाजन सम हुआ तो भारत ने लददाख जो कभी चीन का हिस्सा था चीन की गददारी के बाद उसके तिब्बत को गुलाम करने के क्रम में लददाख को अपने अधीन किया । तो कालांतर में सिक्किम की स्वेच्छा से उसका अपने में विलय किया । इसी प्रकार भारत ने पाक के कुछ हिस्सों का अपने में पुनर्विलय भी किया ।

भारत को अगर कश्मीर की समस्या या इस प्रकार या किसी अन्य प्रकार की समस्या का हल निकालना या पाना है तो ज्योतिषीय दृष्टिकोण से उसे इन संदर्भों का ध्यान रखना ही होगा ।

भारत, पाकिस्तान व चीन

 पाकिस्तान का मूलांक 5 जबकि चीन का 1 है जबकि पाक का लग्न मिथुन जबकि चीन का तुला  है । भारत के जन्मांक 6 व गणतंत्रांक 8 का 5 मित्र जबकि 1 त्रु है, साथ ही पाक का लग्न मिथुन भारत के लिए धन भाव जबकि चीन का लग्न तुला भारत का 6: बनाम रोग, रिपु, त्रु है  भाव है: साथ ही चतुर्थ के चतुर्थ बनाम भूमि के भूमि का व्यय भाव है । यही कारण है कि चीन भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या है । 

भारत को चाहिए कि चतुर्थ स्थान बनाम भूस्थान का ध्यान रखते हुए एक ऐसे लग्न में जम्मू- कश्मीर को आर्टिकल 370 से भारत को मुक्त कर भारत में विलय किया जाए जो कि भूमि अर्थात् चतुर्थ स्थान के लग्न का रिपु, मृत्यु, व्यय आदि स्थान बनाम लग्न न हो और न ही भारत की लग्न-कुंडली का रिपु, मृत्यु, व्यय आदि स्थान हो । इस प्रकार चतुर्थ से षष्ठ नवम भाव मकर, चतुर्थ से अष्टम भाव मीन, चतुर्थ से व्यय भाव कर्क लग्न में ऐसा नहीं होना चाहिए । इसी प्रकार भारत के लग्न से  षष्ठ तुला, अष्टम धनु, व्यय मेष लग्न में भी ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए ।

भारत के लग्न वृष, भूमि स्थान सिंह, भूमि स्थान का धन स्थान पंचम कन्या, चतुर्थ का चतुर्थ बनाम भूमि का भूमि स्थान वृश्चिक, चतुर्थ का सप्तम साझेदार स्थान बनाम भारत का कीर्ति स्थान कुंभ लग्न इसके लिए अतिशुभ हैं । भारत का मूलांक 6 या भारत के संविधान का मूलांक 8 इसके लिए सर्वोतम रहेगा । इस प्रकार भारत की समस्या का समाधान हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर जो कि भारत का अभिन्न अंग है सदा के लिए समस्या व विकारमुक्त हो जाएगा ।

ज्योतिष के अनुसार लग्न की शुभ स्थिति से ही अधिकांश हल हो जाएगा । यद्यपि दशा का ध्यान भी रखना होगा । लग्न, लग्नेश, लग्न नक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र का नक्षत्र, लग्न उपनक्षत्र का उपनक्षत्र यदि स्वगृही या उच्च ग्रह हो तथा साथ ही वह लग्न और भाव से लग्न, दम, एकाद जैसे शुभ स्थानों में ही स्थित् हो, अथवा कम-से-कम 6: बनाम रोग, रिपु, त्रु , 8: मृत्यु, 12: व्यय स्थान या भाव से संयुक्त न हों व परस्पर त्रु भाव व दृष्टि से परे हो तो और भी अच्छा, ऐसे योग में ऐसे लग्न में कार्य करने में उस कार्य को शुभत्व प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकते । साथ में दशा का विचार करना आवश्यक है क्योंकि इससे आरंभ से ही शुभ फल मिलने लगेंगे ।

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