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Monday, November 24, 2025

अबकि बार फिर नितीश कुमार शपथ-ग्रहण

कर शपथ कर शपथ कर शपथ

शपथ-ग्रहण

20.11.2025 11.37 सुबह,पटना


लग्नेश/ग्रह-नक्षत्र-उपनक्षत्र : उपनक्षत्र का नक्षत्र

लग्न मकर : शनि-चंद्र-शुक्र : वृह.

ग्रह सूर्य : मंगल-शनि-शनि : वृह.

ग्रह चंद्र : मंगल-शनि-शनि : वृह.

ग्रह मंगल : मंगल-बुद्ध-बुद्ध : शनि

ग्रह बुद्ध : मंगल-शनि-शनि : वृह.

ग्रह वृह. : चंद्र-वृह.-मंगल : बुद्ध

ग्रह शुक्र : शुक्र-वृह.-शनि : वृह.

ग्रह शनि : वृह.-वृह.-मंगल : बुद्ध

ग्रह राहु : शनि-वृह.-वृह. : वृह.

ग्रह केतु : सूर्य-शुक्र-वृह. : वृह.

राशि एवं लग्न

२० नवंबर २०२५ को मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तिथि को वृष्चिक राशि के अनुराधा नक्षत्र में शपथ-ग्रहण हुआ । वृष्चिक के स्वामी मंगल अनुराधा के स्वामी शनि हैँ । उस समय मकर लग्न श्रवण नक्षत्र में उदित हो रहा था । मकर के स्वामी शनि और श्रवण के स्वामी चंद्र हैँ । इस प्रकार राशि और लग्न में शनि, मंगल, चंद्र में शनि की प्रधानता है, जो वक्री हैँ; तथा तीसरे स्थान बनाम आयु स्थान में बैठे हैँ' अलबत्ता भाव में दूसरे बनाम धन, कुटुंब में बैठे शुभ हैँ । मंगल,चंद्र अस्त हैँ । इनकी विवेचना आगे की गई है ।

२० नवम्बर २०२५, 

मार्ग शीर्ष मास अमावस्या तिथि, 

मकर लग्न श्रवण नक्षत्र,

वृश्चिक राशि अनुराधा नक्षत्र;

मकर ( शनि ) श्रवण (  चंद्र ),

वृष्चिक ( मंगल ) अनुराधा ( शनि ); 

शनि वक्री, चंद्र और मंगल अस्त !

अबकी बार शपथ मकर लग्न वृश्चिक राशि शनि महादशा शनि अंतर्दशा में हो रहा है ।

अमावस्या दिवस

शपथ-ग्रहण अमावस्या के दिन हुआ था । इसलिए यह भी एक ध्यान देने योग्य बात है ।

ग्रह

 कुंडली मे चंद्र, बुद्ध, मंगल अस्त जबकि  बुद्ध, वृहस्पति, शनि वक्री हैँ ।

इनमे बुद्ध अस्त और वक्री दोनो हैँ ।

यह बात ध्यान देने योग्य दीगर है ।

 लग्न

शनि के लग्न पर राहु विराजमान हैँ । शनि दास एवं राहु मलेच्छ ग्रह हैँ । इसलिए सेवक के साथ तामसिक भोगी वृतियों का भी सरकार की प्रकृति में समावेश होगा ।

लग्न : केपी

 लग्न शनि राशि चंद्र नक्षत्र शुक्र उप-नक्षत्र में है तथा शुक्र वृहस्पति नक्षत्र में हैँ जो उच्च सह वक्री हैँ । 

शनि, चंद्र, वृह. सात्विक जबकि शुक्र तामसिक ग्रह हैँ । अलबत्ता चंद्र, वृह., शुक्र स्वाभाविक शुभ ग्रह हैँ । इस प्रकार सरकार में सतगुण का प्रभाव तमगुण से अधिक होगा ।

लग्न और केपी लग्न

चंद्र, वृह., शनि सत तो शुक्र, राहु तम को इंगित कर रहे हैँ । इस प्रकार सात्विक प्रवृति के साथ कुछ तामसिक गुणों के साथ सरकार चलेगी ।

चुंकि लग्न के उपनक्षत्र के नक्षत्र वृह. हैँ इसलिए सात्विकता की मात्रा इसका फाइनल परिणाम होगा ।

वृह. २, ३, ६, ७, १२ को दर्शा रहे हैँ और 6 में हैँ' ६ रोग ऋण रिपु मुकदमा का है इसलिए कई कारक चीजों के बीच विवाद भी होगा ।

भाव

भाव-कुंडली में शनि 2, राहु 1, वृहस्पति 6, केतु 7, सूर्य' चंद्र' मंगल' बुद्ध' शुक्र १० हैँ ।

केपी भाव

केपी भाव-कुंडली में शनि 2, राहु 1, वृहस्पति 6, केतु 7, सूर्य' चंद्र' बुद्ध, शुक्र 9 तथा मंगल 10 में स्थित हैँ ।

विश्लेषण

इस प्रकार भाव-कुंडली तथा केपी भाव-कुंडली में सूर्य चंद्र बुद्ध शुक्र की दशम या नवम स्थिति को लेकर भेद है, अपितु दोनो शुभ स्थान हैँ । लेकिन केवल शुभ स्थान होने से ग्रह शुभ फलदाई हो जाएँ जरूरी नहीं, उनका स्वयं भी उनके कारकत्व एवं स्थिति अनुसार शुभ होना अनिवार्य होता है । शुभ स्थान में होने से उनके शुभ होने का एडवांटेज अवश्य मिल जाता है । मगर फाइनल फलादेश के लिए और भी विवेचन करना अनिवार्य है ।

सूक्ष्म अध्ययन के लिए भाव के बाद केपी भाव की गणना की जाती है अथवा करनी चाहिए ।

विस्तृत सूक्ष्म विवेचन

वृह. सबसे अधिक बार और बारम्बार राशि, नक्षत्र, उपनक्षत्र, उपनक्षत्र का नक्षत्र सह दृष्टि आदि प्रभाव देते हुए स्पस्ट हैँ , इसलिए समस्त सरकार की आयु एवं स्थायित्व के साथ सभी दशा के फाइनल परिणाम देने वाले वृह. ही हैँ ।

लग्न

शनि - चंद्र - शुक्र - वृह.

महादशा - अंतर्दशा

शनि - शनि : २०.११.२०२५ - 20.०४.२०२८

शनि - बुद्ध : २०.०४.२०२८ - 29.१२.२०३०

शनि - केतु : २९.१२.२०३० - 08.०२.२०३२

महादशा के नक्षत्र और आगामी 5 बरस तक की अन्तरद्शा स्वामी के उप-नक्षत्र के नक्षत्र स्वामी वृहस्पति हैँ । वृहस्पति उच्च सह वक्री हैँ । यूं तो 3, १२ के स्वामी दिख रहे हैँ मगर एडवांस केपी कुंडली में वृहस्पति 2, 12 के स्वामी हैँ । इनमे 2 भाव में महाद शनि तो 12 में रिक्त स्थान है; इसलिए 1२ का प्रभाव अधिक आएगा । वृहस्पति स्वयं 7 में हैँ मगर भाव में 6 हैँ, इसलिए 6 का प्रभाव भी आएगा ।

2, 7 शुभ तो 6, 12 बाधा पैदा करने वाले माने जाते हैँ । 2 धन' कुटुंब, 7 साझेदारी' आयात-निर्यात, ६ रोग, ऋण, रिपु विवाद मुकदमा, 12 व्यय' अस्पताल' समस्या के कारक हैँ । वृह इन सबसे जुड़े हैँ । इसलिए इन सबका फल देंगे । मगर अपनी प्रकृति अनुसार । क्योंकि ग्रह फलादेश के मापदंड को पुरा करते हैँ मगर अपने स्वभाव और प्रकृति अनुसार ।

 वृह. की प्रकृति सौम्य है । लीगल है । ऑथेंटिक है । इसलिए सबकुछ लाभ एवं विरोध वगैरह सौम्य तरीके से होगा । यद्यपि फल वही होगा जो ज्योतिष के नियम कहते हैँ' जो ऊपर कहे गये हैँ । 

सरकार में आर्थिक योग्यता, कटुंब-भाव होगा मगर साझेदारी की अच्छी स्थिति के बाद भी राशिगत समानता के कारण सहभागिता के बावजूद नीच के चन्द्रमा के कारण मतांतर होगा, समस्या होगी । विवाद-मुकदमा होगा ।

 वृह. गुरु कहे गए हैँ क्योंकि वृह. गुरु और धर्म के कारक हैँ; वृह. भाव में 6 हैँ इसलिए शैक्षिक और धार्मिक मामलों पर कंट्रोवर्सी मतांतर होगा । शिक्षक एवं शिक्षण मामलों में विवाद की आशंका है । इसमे शिक्षकों की मांग से लेकर प्रश्न पत्र लीक या अन्यांय कोई भी शिक्षा या शिक्षण सम्बन्धी कारण होंगे । अगर ये कारण ना हुआ तब भी शिक्षक या शिक्षण संस्थान से आमना सामना टकराव के आसार दीखते हैँ ।

बाधक स्थान

स्थिर लग्न के लिए नवम भाव, चर लग्न के लिए एकादश भाव, द्विस्वभाव लग्न के लिए सप्तम भाव बाधक स्थान बनाम बाधाकारक होते हैँ । जबकि आमतौर पर यह तीनो स्थान ही 7, 9, 11 कुंडली के कारक स्थान माने जाते हैँ, मगर लग्न की स्थिर चर द्विस्वभाव प्रकृति अनुसार इनकी स्थिति फलादेश में अतिरिक्त फलादेश अथवा अंतर पैदा होता है । बाधक स्थान मारकेश प्रभाव रखते हैँ, और यह केपी कुंडली में भी मान्य है । इसलिए तमाम फलादेश के बावजूद इनकी इस फलादेश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ।

एकादश में ग्रह बाधाकारक हैँ मगर राहत की बात यह है की इनमे किसी की महादशा नहीं चल रही है । हां ! आगामी अंतर्दशा में बुद्ध की अंतर्दशा अवश्य चलनेवाली है । यह बाधक प्रभाव देंगे । महादशा चुंकि शनि की है अतः एकादश् में बैठे इन चार ग्रह सूर्य, मंगल, बुद्ध, शुक्र के कारण मारक बाधा नहीं होगी । मगर बाधामय स्थिति होगी । बुद्ध अंतर्दशा में अल्लायंस या उनके लोग या पार्टी से मतभेद विवाद होगा । इनसे मतभेद होगा । बुद्ध के स्वाभाविक वाणिज्यकारक होने तथा 6 ऋण भाव स्वामी होने से व कारण आर्थिक और नवम भाव स्वामी होने से धार्मिक मसले पर विवाद मतभेद होगा । चंद्र नीच होने से मतांतर पैदा करता है, एकादश में नीच होने से मैत्री में मतभेद या मतांतर दर्शाता है । क्योंकि चन्द्रमा मन कारक है । एवं सप्तम स्वामी होकर नीच होने से साझेदारी में समस्या को दर्शाता है । ऐसा हो सकता है घटक दल मे कोई या कुछ हट जाएँ या हटा दिये जाएँ । सूर्य के कारण शासकीय नीतियों से नाराजगी भी एक बड़ी वजह हो सकती है । सूर्य अस्टम अर्थात सप्तम के द्वितीय मतलब सरकार के साझेदार की किसी मौखिक वानी आदि के कारण मैत्री संबंधों में विवाद होगा । क्योंकि सूर्य एकाद्श अर्थात मैत्री स्थान में हैँ । मुख्य पार्टी की किसी नीति से रुस्त होकर विषमता की स्थिति बनेगी । मंगल के कारण भूमि, ठेकेदारी से रिलेटेड प्रसंग भी उठेंगे । मगर इन चारों सूर्य, मंगल, बुद्ध, शुक्र में आगामी दशा बुद्ध की अंतर्दशा है । इसलिए सर्वाधिक कारण बुद्ध का ही लक्षित होगा । इसलिए मसला आर्थिक-व्यापारिक नीतियो और धार्मिक, जातीय विवाद या नियमावली वगैरह का होगा । 

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 इसलिए इस प्रकार मिश्रित फल मिलेगा ।

साझेदारी में मतविभिन्नता या मतविविधता ।

राशि

बीजेपी, मोदी,नितीश इन तीनों की वृश्चिक राशि है; शपथ ग्रहण के दिन भी वृश्चिक राशि ही थी । शायद संयोग से अथवा ज्योतिषीय आधार पर ऐसा किया गया हो । एक हद तक ठीक भी है । क्योंकि तीनो की समान राशि होने के कारण ही इनकी आपस में बनती भी है ।

मगर केवल राशि समान होने से सबकुछ आसान हो जरूरी नहीं, इसके लिए कई अन्य बातों का भी ध्यान रखना होता है । इसलिए कई विषमताओं के बाद स्थिति सुधरेगी ।

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लग्न पर राहु शनि प्रभाव है ।

लग्न पर वृहस्पति की दृस्टि है ।

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महादशा सह अंतर्दशा

महादशा के नक्षत्र एवं अंतर्दशा के तमाम उप-नक्षत्र के नक्षत्र स्वामी वृहस्पति हैँ । वृहस्पति उच्च सह वक्री हैँ । यूं तो 3, १२ के स्वामी दिख रहे हैँ मगर एडवांस केपी कुंडली में वृहस्पति 2, 12 के स्वामी हैँ । इनमे 2 भाव में शनि तो 12 में रिक्त स्थान है; इसलिए 1२ का प्रभाव अधिक आएगा । वृहस्पति स्वयं 7 में हैँ मगर भाव में 6 हैँ, इसलिए 6 का प्रभाव भी आएगा ।

:: फलादेश विशेष ::

: दशा विशेष :

शनि - शनि

शनि - बुद्ध

शनि - केतु

शनि : नक्षत्र वृहस्पति उपनक्षत्र मंगल उपनक्षत्र का नक्षत्र बुद्ध

बुद्ध : नक्षत्र शनि उपनक्षत्र शनि उपनक्षत्र का नक्षत्र वृहस्पति

केतु : नक्षत्र शुक्र उपनक्षत्र वृहस्पति उपनक्षत्र का नक्षत्र वृहस्पति

लग्न : नक्षत्र चंद्र उपनक्षत्र शुक्र उपनक्षत्र का नक्षत्र वृहस्पति 

शनि, बुद्ध, केतु के उपनक्षत्र के नक्षत्र स्वामी वृहस्पति हैँ ।

लग्न के उपनक्षत्र के नक्षत्र स्वामी वृहस्पति हैँ ।

इस प्रकार वृहस्पति स्पष्ट रूप से ना सिर्फ लग्न के स्तर पर बल्कि सम्पूर्ण दशा के स्तर पर अपना फल दे रहे हैँ ।

ज्ञात हो कि सूक्ष्म-गणना बनाम एडवांस मेथड में राशि या ग्रह अथवा राशि या ग्रह के नक्षत्र जहां फलादेश में कारक भूमिका निभाते हैँ तो राशि या ग्रह के उपनक्षत्र और उपनक्षत्र का नक्षत्र स्वामी फलादेश में निर्णायक भूमिका निभाते हैँ । अगर राशि या ग्रह के उपनक्षत्र स्वामी के नक्षत्र में कोई ग्रह ना हो तो उपनक्षत्र स्वामी ही ग्रह की निर्णायक भूमिका करता है; अथवा उपनक्षत्र स्वामी के नक्षत्र में कोई ग्रह हो तो उपनक्षत्र का नक्षत्र स्वामी ग्रह का निर्णायक फल स्पस्ट करता है ।

इसमे एक बात और ध्यान देने लायक़ है कि अगर उपनक्षत्र स्वामी स्वनक्षत्र में है तो उपनक्षत्र स्वामी ही ग्रह की निर्णायक भूमिका निभाता है ।

आत्मकारक एवं अमात्यकारक

शुक्र आत्मकारक होकर दशम में स्वराशी होकर मालव्य योग का निर्माण कर रहे हैँ ।

मंगल अमात्यकारक होकर एकादश में स्वागृही हैँ यद्यपि अस्त प्रभाव भी है ।

इनकी 10, 11 स्थिती इनके सबल स्थति को दर्शा रहा है । ल

पंचमहापुरुष : हंस और मालव्य

शपथ-ग्रहण कुंडली में पंच महापुरुष योग में से दो योग हंस और मालव्य योग कुंडली में मौजूद हैँ । मंगल, बुद्ध, वृहस्पति, शुक्र, शनि केंद्र अर्थात 1, 5, 7, 10 स्थान में स्वराशि या उच्च राशि में स्थित हों तो पंचमहापुरुष योग का निर्माण होता है । मंगल से रूचक, बुद्ध से भद्र, वृहस्पति से हंस, शुक्र से मालव्य, शनि से शश पंचमहापुरुष योग का निर्माण होता है । वृहस्पति केंद्र में 7 तथा शुक्र केंद्र में 10 में बैठकर मालव्य योग का निर्माण कर रहे हैँ । यद्यपि भाव मे वृहस्पति 6 तथा केपी भाव में वृहस्पति 6, शुक्र 9 होकर पंचमहापुरुष योग को अपेक्षाकृत कमजोर कर रहे हैँ । फिर भी यह मात्र पंच महापुरुष मामले में ऐसा करेंगे, इससे इस योग के दोनो ग्रह वृहस्पति, शुक्र के अनय फलों में कोई कमी नहीं आएगी । वो अन्य मामलों मैं ज्योतिषीय नियमों के अनुसार समान रूप से अपने बल आदि अनुसार अपना फल देते रहेंगे ।

हंस योग चुंकि सप्तम में उच्च वृहस्पति वक्री द्वारा बना है इसलिए उच्च बौद्धिक क्षमता, राष्ट्रवादी, धर्म परायन लोगो का सहयोग एवं साझेदारी मिलेगी । 

मालव्य योग चुंकि दशम में स्वगृही शुक्र द्वारा बना है इसलिए कर्म-क्षेत्र में विशेषतः परिवहन, मनोरंजन, शिक्षा, कंस्ट्रक्शन, बीज, मैन्युफैक्चरिंग आदि के कार्याँव्यन में अधिक और अच्छी सफलता मिलेगी ।

राशि एवं लग्न समानता

संयोग या प्रयोग

बीजेपी, नीतिश, शपथ-ग्रहण की कुंडली तीनो ही वृश्चिक राशि हैँ; और तो और बीजेपी और नीतिश  जी का लग्न तक समान है, मिथुन लग्न !

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सारांश 

राशिगत समानता के कारण बीजेपी, मोदी, नितीश कॉम्बिनेशन फलीभूत होगा । लग्न-स्थिति के कारण धन, संचार, लोन-क्षेत्र में प्रोग्रेस के बाद भी शैक्षिक, जातीय, धार्मिक मतभेद उभरेंगे; मगर लॉफुल मीनिंग में जारी रहेंगे अथवा सुलझा लिए जाएंगे । सप्तम और सप्तमेश के कारण साझेदारी में अच्छे समर्थन के बाद एवं बावजूद साझेदारी और मैत्री-संबंधों में मतभेद उभरेगा । अष्टम सूर्य एकादश में मैत्री भाव के स्वामी एकादशेष स्वगृही मंगल के साथ एकादश में बैठे सप्तम स्थान बनाम साझेदार स्थान' विवाह स्थान के स्वामी चंद्र जो पहले से ही नीच राशि में निर्बल हैँ के साथ भाग्य-स्थान् सह उच्च शिक्षा भाव स्वामी बुद्ध बनाम व्यापारिक लोग, काउंट्रेक्टर आदि को मैत्री-भाव बनाम एकादश भाव में अस्त कर रहे हैँ; इसलिए किसी सरकारी आदेश से मित्र-मंडली, साझेदारों, व्यापारिक आदि मित्रों आदि में मतभेद या असंतोष को दर्शा रहे हैँ । एकादश की ग्रह और भाव-स्थिति के कारण कई कारक कार्य के बीच व्यापार, अर्थ, धार्मिक-जातीय नियम कानून, जल, बाल, स्त्री, भूमि, ट्रांसपोर्ट जैसे कारणों से मतभेद पैदा करेंगे । इस प्रकार कार्यकारी सरकार होने के बावजूद कई प्रकार की वैचारिक असमानता से साथी, सहयोगी, साझेदार, मित्र, परीचित आदि से असंतोष, मनमुटाव वगैरह किसी मसले आदि पर इसके दशाफल होंगे । यद्यपि सारी गतिविधियाँ अहिंसक, विरोध-प्रदर्शन तक सीमित होंगी, हिंसक मोड़ नहीं लेंगी । भले सरकार अल्लायंस में मतविभिन्नता और वैचारिक असमानता किसी स्तर तक हो जाये । अर्थ यह हुआ कि समान वैचारिक गठबंधन युति की सरकार दशा प्रभाव से सामयिक स्तर पर विविध वैचारिक मतभेद से गुजरेगी । अपितु कोई भी मसला हिंसक नहीं होगा, बात ध्यान देने योग्य है । 

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Sunday, October 26, 2025

बिहार : वर्तमान सरकार का भविष्य

अमित कुमार नयनन 

[ एक सटीक विश्लेषण ]

इस पूर्व विश्लेषण की विशेषता यह है कि नितीश कुमार ने जब 26.११.२०१० में शपथ-ग्रहण किया था ही नितीशजी के स्वेच्छा से पद छोड़ पद पर किसी और को आसीन करने की भविष्यवाणी की गई थी । उस वक़्त लोग जीतनराम मांझी का नाम तक लोग ठीक से नहीं जानते थे । इसमे उनके आसीन होने का ज्योतिषीय कारण के साथ स्पष्ट भविष्यकथन किया गया था ।

शपथ-ग्रहण की यह कुंडली ना सिर्फ ज्योतिष प्रेमियों के लिए एक सटीक उदाहरण है बल्कि साथ ही यह भी बताता है कि  शपथ-ग्रहण के आधार पर निर्मित कुंडली भी भविष्यगणना में कितनी अधिक कारगर होती है ।


बिहार : वर्तमान सरकार का भविष्य 

[ "टाइप्ड वर्शन" ]

मुख्यमंत्री नितीश कुमार का शपथ ग्रहण मेष लग्न ( स्वामी मंगल ) अश्विनी नक्षत्र ( स्वामी केतु ) में हुआ । राशि के हिसाब से कर्क राशि के पुष्य नक्षत्र में इस सरकार का जन्म हुआ, जो कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शुभ मुहूर्त है । लग्न के हिसाब से लग्नेश का अष्टम में होना बहुत शुभ नहीं होता, मगर स्वगृही  होने से वह अपनी दुसरी राशि अर्थात् लग्न को अपने स्थान से दुगुना फल प्रदान करते हैं । इस आधार पर सरकार की विपरीत स्थितियों में स्थायित्व को सूचित करती है ।

शुभ पक्ष :- 

* चन्द्रमा चतुर्थ स्थान अर्थात् जनता भाव मे स्वगृही हैं अर्थात यह जनता के लिए विशेषकर महिलाओं के लिए विशेष शुभ होगी । चतुर्थ में किसी पाप या अशुभ ग्रह की दृष्टि नहीं है । इस कारण यह जनप्रिय सरकार सिद्ध होगी । चन्द्रमा ( राजसी ) पुष्य ( शनि : सेवक ) नक्षत्र में होना इसे सभी प्रकार की जनता व बुद्धिजीवियों का समर्थन व सहयोग दिलाएगा । महिला इस सरकार की प्रबल समर्थक होंगी ।

* सप्तम में ( साझेदारी का भाव ) स्वगृही शुक्र अपने द्वितीयेश राशि की दुगुनी ताक़त से वृद्धि कर रहा है । सप्तम (साझेदारी ) और द्वितीय ( मित्र ) भाव इस सरकार को भरोसेमंद मित्र और सहयोगी एवं साझेदार देते हैं जो सरकार को स्थिर रखने में कारक भूमिका निभाते हैं । 

अशुभ पक्ष :- 

* पंचमेश का अष्टम में होना उपयुक्त उत्तराधिकारी के न होने का सूचक है, अथवा ऐसा भी हो सकता है कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व अधिकारी पर खतरा आ जाए, दाग लग जाए अथवा उसके साथ अशुभ घटित हो । अष्टम ( मृत्यु ) में सूर्य, मंगल, बुद्ध का संयोग सरकार की किसी विशेष मसले पर किरकिरी कराने में समर्थ है । षष्ठेश बुद्ध अष्टम में सूर्य, मंगल के साथ संयुक्त हैं । षष्ठ एक्सीडेंट, अष्टम मृत्यु व पंचम उत्तराधिकारी का संयोग किसी दुखद कांड या आकस्मिक बाधा की सूचना देता है । या फिर ऐसा भी हो सकता है कि किसी शीर्ष अधिकारी की दुर्घटना या किसी अन्यान्य कारण से मौत हो जाए अथवा उसके स्थान पर हटने के कारण किसी दूसरे का उस स्थान पर आगमन हो ।

दशाफल :-

शनि की महादशा :- शनि षष्ठ में चन्द्रमा के नक्षत्र व केतु के उपनक्षत्र में हैं । इस तरह उनका चतुर्थ और नवम से सीधा सम्पर्क है । दशम, एकादश का स्वामी होने के नाते शनि को शुभत्व में अतिरिक्त बल प्राप्त है । शनि षष्ठ में आर्थिक मामलों में सफलता व बढ़ते साझेदारों व फाइनेन्सरो की सूचना देते हैं । जनता व भाग्य का सहयोग चतुर्थ, नवम से स्पष्ट लक्षित है । केतु बुद्ध के कारक हो, जो कि अस्टमस्थ हैं, के कारण नवम के साथ अष्टम का फल देते हैं व कुछ आकस्मिक बाधाओं की सूचना देते हैं । इस प्रकार अधिकतम शुभ व आकस्मिक बाधा दोनो लक्षित है ।

* आत्मकारक वृह. ( एकादश ) और अमात्यकारक बुद्ध ( अष्टम ) एक-दूसरे से केंद्रवत हैं । अमात्यकारक बुद्ध का अष्टम ( मृत्यु ) भाव में होना ( अमात्य ) अर्थात मंत्रीमंडल में विघटन व फेरबदल करवाता है । इस प्रकार इस सरकार के मंत्रीमंडल मे फेरबदल के काफी हद तक संकेत हैं । 

सारांश : एक जनप्रिय सरकार जिसके मंत्रीमंडल में फेरबदल होगी मगर साझेदारी में ब्रेक अप की स्थति नहीं है । अतः यह एक सुशासन सरकार सिद्ध होगी ।


बिहार का चिराग

कुंडली : चिराग पासवान


31.10.1982 12.15 pm मधुबनी

 मुख्यमंत्री या उप-मुख्यमंत्री या किंगमेकर

: क्या कहती है कुंडली :

सच कहा जाए तो चिराग की कुंडली दशा और गोचर दोनो के हिसाब से सबसे अधिक प्रबल है । अलबत्ता अन्य प्रत्याशियों में मात्र नितीश जी की ही प्रचलित प्रमाणिक कुंडली है, जिस कुंडली की जन्म-तिथि और समय दोनो प्रचलित है । अन्य लगभग तमाम प्रत्याशियो की तिथि-मात्र मौजूद है । एकमात्र तेजस्वी हैं जिनकी कुंडली प्रचलित है । उनके भी कमोबेश कुछ अच्छे ग्रहयोग अवश्य है मगर गोचर में आरम्भिक सपोर्ट के बाद बाद में उतना सपोर्ट नहीं कर रहे हैँ हालांकि कोई नकारात्मक रिजल्ट नहीं दे रहे हैं मगर मैदान में जब कई खिलाड़ी हों तो आपको नंबर एक बनने के लिए फुल सपोर्ट या अन्य से अधिक सपोर्ट या समर्थन की जरूरत पड़ती है । इस प्रकार यहां ग्रहों का समर्थन तो है मगर कुछ कमी रहने से इन्हे कुछ समर्थन की जरूरत पड़ेगी सत्ता के लिए । असल में जिस खेल में कई खिलाड़ी खेलते हों तो उसमे एक के बाद भी कई नंबर तक विजेताओं की गणना होती है । टॉप तीन तो कोई टॉप टेंन तक भी गणना होती है । इस प्रकार तुलनात्मक अध्ययन में इनका प्रथम के बाद नंबर टू या उसके बाद का नंबर आना दिखता है ।

प्लेनेट सपोर्ट

जेड यू : दशा सह गोचर

चिराग : दशा सह गोचर

नितीश : दशा सह गोचर

राजद:  दशा सह गोचर @ दिवस कुंडली

तेजस्वी : दशा सह गोचर

बीजेपी : दशा सह गोचर

प्रशांत : दशा सह गोचर @ दिवस कुंडली

जन सुराज : दशा सह गोचर

इसमे दिवस-कुंडली को हम प्रमाणिक नहीं मानेंगे क्योंकि यह प्रमाणिक कुंडली नहीं होती है मगर उस दिन की ग्रह अवस्था और उस अवस्था से संकेत और गोचर आदि अध्ययन द्वारा भविष्य आकलन की कोशिश की जाती है ।

तुलनात्मक अध्ययन में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि क्या सभी समान स्थिति में हैं । अगर हैं तो उनके बीच की दशा और गोचर सीधे तौर पर जो परिणाम देती है वही रिजल्ट माना जाता है ।

अगर अवस्था में परिवर्तन है तो इसमे किसकी कितनी प्रबल दशा है उसके आधार पर यह देखा जाता है कि कमतर स्थति वाला किस प्रकार अधिकतम की ओर कहां तक अग्रसर होगा ।

ऊपर चिराग की ग्रह-दशा एवं गोचर अन्य सबों से प्रबल है । इसलिए वो अपने पोजीशन में सुधार करते ऊपर आएंगे । मगर चुंकि नितीशजी का भी ग्रह और गोचर अच्छा है इसलिए उनकी स्थिति बनी रहेगीे । मगर चुंकि चिराग के ग्रह और गोचर उनसे प्रबल है अतः चिराग की अपनी स्थिति में अवश्य उछाल आएगा और चिराग का आनुपातिक प्रदर्शन बेहतर होगा । 

तुलनात्मक अध्ययन में कई नहीं बल्कि सारी बल्कि कई सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है । इस हिसाब से सच कहा जाए तो जेडयु की प्रबल दशा और गोचर तथा नितीशजी का भी संतोषजनक दशा गोचर उनकी वर्तमान स्थति को सुरक्षित करता दिखता है । अन्यथा जिस प्रकार चिराग की कुंडली में प्रबल योग दिख रहे हैं इससे कहा जा सकता था कि अगर ऊपर ग्रह-योग के हिसाब से नितीशजी और जेड-यु की ग्रह स्थिति इतनी संतोषप्रद स्थिति नहीं होती तो चिराग उलट-फेर करते मुख्यमंत्री भी बन जाते तो आश्चर्य नहीं था ।

फिर भी ग्रहयोग चुंकि अति प्रबल हैं इसलिए सफलता और सत्ता तो देंगे ही । इनकी और इनकी पार्टी लोजपा की भी अच्छी दशा इनके चुनाव में आनुपातिक रूप से सबसे अच्छे प्रदर्शन को दर्शाती है । सत्ता पक्ष में अच्छे पद को दर्शाती है । इसलिए मुख्यमंत्री नहीं तो उप-मुख्यमंत्री भी बन सकते हैँ । अथवा किंगमेकर भी बन जाएं तो आश्चर्य नहीं !

कुंडली में सत्ताकारक योग हैं इसलिए प्रमुख विपक्षी दल के रूप में इनका होना मुशील दिखता है । सत्ताकारक योग इनको  सत्ता दिलाकर रहेंगे ऐसा ग्रह कह रहे हैँ ।

Thursday, October 9, 2025

मगध महाभारत

  इस चुनाव में ....... आगे-आगे देखिये होता है क्या !


बी जे पी 06.04.1980 11.45 AM दिल्ली



जे ड यु 30.10.2003 जन्म-समय : .. दिल्ली

 तात्कालिक दिवस ग्रह स्थिति : जन्म-समय अनुपलब्ध



नीतिश कुमार 01.03.195 01.20 PM लक्खीसराय



प्रशांत किशोर 20.03.1977 जन्म-समय -- शाहाबाद

 तात्कालिक दिवस ग्रह स्थिति : जन्म-समय अनुपलब्ध


जन सुराज 02.10.2024 04.05 PM पटना



चिराग पासवान 31.10.1982 12.15 PM मधुबनी


लोकतान्त्रिक जनशक्ति पार्टी ( लोजपा )

२८.११.२००० जन्म-समय ..दिल्ली

तात्कालिक दिवस ग्रह स्थिति : जन्म-समय अनुपलब्ध




राजद 05.07.1997 जन्म-समय -- पटना

 तात्कालिक दिवस ग्रह स्थिति : जन्म-समय अनुपलब्ध



बीजेपी को एकतरफा बहुमत नहीं मिलेगा ।

बीजेपी की कुंडली में चंद्र नीच राशि की महादशा है जो कि  द्वितीयेश है । महादशानाथ कमजोर होने से सपोर्टिंग पार्टी या कंडीडेट के आधार पर सरकार बनती है सत्ता मिलती है अथवा सत्ता में शामिल होती है । द्वितीयेश कुटुंब घर का स्वामी होता है इसलिए इसके निर्बल होने से अक्सर सीमित लोग और पार्टी का सहयोग मिलेगा । विशेषकर इसकी दशा में ।

पिछले प्रदर्शन के आधार पर जो लोग जेडयू बनाम जनता दल युनाइटेड को अंडरएस्टीमेट  कर रहे हैँ, वो भूल कर रहे हैँ ।

इसकी सीटें बढ़ेंगी और अच्छा बेहतर प्रदर्शन करेंगी ।

प्रशांत किशोर दो धुर प्रतिद्वंदियों एनडीए व आरजेडी  तथा जीतन राम मांझी, चिराग पासवान ऐसे अन्य मुख्य एवं  वोट बैंक चेहरों के होते भी एक नये उभरते चुनावी चेहरे के रूप में चर्चित होकर अपना प्रभाव छोड़ चुके हैँ ।

इसका लाभ उन्हें सीट के रूप में अवश्य मिलेगा । जो लोग उनके खाता खुलने में संदेह कर रहे हैँ, संदेह दूर हो जाएगा ।

लोजपा चिराग पासवान आश्चर्यचकित करते हैँ । लगता था कि  प्रशांत किशोर के आने से कहीं ये हाशिये पर ना चले जाएं या इनका वोट प्रभावित ना हो । पहला तो ऐसा नहीं होगा । अगर हो भी गया तब भी पद के मामले में भाग्यशाली होंगे । अर्थात सीट कम मिलने या आने के बाद भी इनको पद या अन्य लाभ या विशेष लाभ की स्थिति बिल्कुल बनती है ।

आश्चर्यजनक रूप से चिराग पासवान की कुंडली तुलनात्मक अध्ययन में अन्य सबों से अधिक प्रबल है ।

अगर सारांश देखा जाए तो राजग गठबंधन जीत रहा है ।

'सरकार किसी की भी बने, प्रशांत किशोर और चिराग पासवान उसमें अंदर या बाह्रर से अवश्य शामिल होने जा रहे हैँ '

इसमे भी चिराग के सरकार में शामिल होने की अधिक संभावना है जबकि प्रशांत किशोर बाहर से समर्थन दे सकते हैँ । अगर शामिल हो भी जाएं तब भी अपने कंडीडेट के लिए भले कुछ मांग लें मगर स्वयं किसी पद पर काबिज नहीं होंगे । अगर होंगे भी तो उपमुख्यमंत्री पद पर । इसके पीछे कारण  उनका स्वयं को सीएम पद के लिए स्वयं को प्रमोट करना मना जा सकता है । ऐसी स्थिति में कोई भी उससे कम पद पर सोच समझकर आसीन होता है । इसलिये ऐसी स्थति में इनका बाहर से समर्थन देने की अधिक संभावना दिखती है अथवा सरकार में शामिल होने पर स्वयं को किसी अति महत्वपूर्ण सम्मानीय पद पर आसीन होना चाहेंगे । और जिसकी सरकार होती है उसका सबसे प्रमुख पद तो नहीं ही मिल सकता है क्योंकि उसपर तो स्वाभाविक रूप से उनका ही लीडर बैठेगा । तो फिर इसके बाद का सबसे महत्वपूर्ण पद बनता है । इस मामले में सबसे मुख्य पद वह है जिसके लिए चुनाव हो रहा है मुख्यमंत्री पद का । इसके बाद का पद है उप-मुख्यमंत्री का । इसलिये प्रशांत किशोर किसी और की सरकार को या तो बाहर से समर्थन देंगे अथवा सरकार में शामिल होने पर स्वयं हेतु महत्वपूर्ण पद लेंगे और या अथवा अपने कंडीडेट के लिए उचित स्थान पर मानकर स्वयं कोई पद नहीं लेंगे । एक सीएम प्रत्याशी किसी और की सरकार में शामिल हो अपने लिए पद ना ले, इसकी कम संभावना दिखती है क्योंकि यह प्रैक्टिकली कम संभव दिखती है । इसलिए सरकार को बाहर से समर्थन देंगे, ऐसा लगता है । अपनी शर्तों पर !

ऐसा भी हो सकता है कि मुख्यमंत्री नीतीश के अंदर दो उप-मुख्यमंत्री में प्रशांत किशोर और चिराग पासवान हों । हालांकि प्रमुख सहयोगी पार्टी  बीजेपी के खराब प्रदर्शन के बिना यह संभव नहीं है । मगर बीजेपी की स्थिति जेडयू से काफी बेहतर है । ऐसे में नीतीश अपने प्रमुख सहयोगी पार्टी को कभी नाराज नहीं करना चाहेंगे ।

इसका मतलब यह हुआ कि फिर प्रशांत किशोर और चिराग पासवान इनकी सरकार में उप-मुख्यमंत्री के अलावे किसी अन्य मुख्य स्थान पर होंगे या उन्हें अन्य विशेष लाभ मिले । चिराग पासवान तो उनकी सेन्ट्रल सरकार में मंत्री हैँ तो शायद मान भी जाएं मगर प्रशांत किशोर उप-मुख्यमंत्री से कम का या अन्य कोई पद लें संभव नहीं दिखता । इसलिए पुन: उनकी सरकार को बाहर से समर्थन या सशर्त शर्त समर्थन की संभावना बनती है ।

राजद को वोट और शीट तो मिलेंगे मगर समुचित वोट और सहयोग ना मिलने से सत्ता मिलने में संदेह है ।

अगर इनको प्रशांत किशोर और चिराग पासवान का साथ मिले तब ही कोई बात बन सकती है । क्यूंकि इन दोनो की कुंडली में सत्ताकारक योग हैँ ।

Saturday, October 4, 2025

मगध महाभारत : इलेक्शन 2025 बनाम किंग किन्गमेकर

 एनडीए चुनाव जीतेगी । बहुमत एकतरफा नहीं होगा, मगर मिला-जुलाकर सरकार बनेगी । बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा । मगर मिल-जुलकर सरकार बनायेगी या सरकार में शामिल होगी । अपितु अधिक संभावना सरकार में शामिल होने की है ।

प्रशांत किशोर और जन सूराज प्रभाव छोड़ेंगे । स्थिति अनुसार सरकार में शामिल हो सकते हैँ । बाहर से समर्थन की अधिक आशंका है । किन्गमेकर की भूमिका भी निभा सकते हैँ ।

आरजेडी का समीकरण वोट मिलने के बाद भी वोट बनाम सीट कम होने से बिगड़ेगा ।


प्रशांत किशोर : एक राजनितिक युवा का भविष्य

Prashant kishore Kingmaker ? @ election 25*



प्रशांत किशोर अनुमानित कुंडली : 20 मार्च 1977 शाहाबाद जन्म-समय : अज्ञात




जन-सूराज कुंडली : 2 अक्टूबर 2024 4:05 पीएम पटना


कुंडली : जन सुराज नवमांश


Kingmaker ? Prashant kishore @ election 25*


 प्रशांत किशोर की कुंडली के अनुसार इनको अधिक सीटें नहीं मिल रही हैँ, मगर वोट प्रतिशत में इनकी स्थिति बेहतर है ।

इनके कैंडिडेट जहां भी उतरेंगे इनका वोट अन्य की मेजोरिटी को निश्चित रूप में प्रभावित करेगा ।

उस स्थान के अन्य पार्टी प्रतिद्वंदियों के बीच कांटे की टक्कर होगी । उनके बीच वोट का मार्जिन कम या बहुत कम होगा ।

कुछ या कुछेक मामलों में इनको सीधा लाभ मिलता भी दिख रहा है । अर्थात कुछ स्थाओं पर यह उलट-पलट करते भी नजर आ रहे हैँ ।

इसका अर्थ यह हुआ कि इनको कुछ सीटें मिलने की पुरी संभावना है ।

हांलाकि सीट की संख्या अधिक नहीं होगी ।

कुछ सीट अवश्य मिलेगी । कुछ स्थानों पर कांटे की टक्कर होगी । कुछ स्थानों पर स्वयं भले ना जीतें मगर दूसरे की हार का कारण बनेंगे । ऐसे तो कोई भी अन्य पक्ष ही जीतता है मगर कहने का अर्थ यह हुआ की किसी की सरल जीत को कठिन तो किसी की निश्चित जीत को हार का मुख दिखाएंगे । भले उन स्थानों पर स्वयं ना जीतें ।

साथ ही कुछ स्थानों पर इनको इसका लाभ स्वयं की भी कुछ स्थानों पर जीत का मिलेगा ।

और यह जीत सीट के रूप में भी हासिल होगी ।

उपरोक्त तमाम बातें उनकी संख्यात्मक, प्रतिशत तथा सीट तीनों आधार के लिए कही गई हैँ ।

तथापि

सीट के अपने मायने हैँ !

लोग केवल खिलाड़ी का अच्छा खेल ही नहीं देखना चाहते, उसका  स्कोरबोर्ड भी चलता हुआ देखना चाहते हैँ ।

तो उस आधार पर कहा जा सकता है कि स्कोर बनेगा और सीट हासिल होंगी ।

खेल की भाषा में भले कोई रिकॉर्ड बनाएं ना बनाएं, मगर अपनी छोटी-सी पारी को भी महत्वपूर्ण सिद्ध करेंगे ।

इनका खेल स्कोर के लिए नहीं अपनी पारी और खेल के लिए प्रदर्शन के लिए जाना जाएगा ।

इनकी छोटी-सी पारी तमाम प्रतिद्वंदियों के माथे पर सिकन लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी । ऐसा ग्रह कहते हैँ ।

संक्षेप में प्रशांत किशोर या  इनकी पार्टी हारे या जीते प्रशांत किशोर बाजी जीतेंगे । बाजी जीतने का अर्थ अपनी छाप छोड़ना है !  सत्तपाक्ष और विपक्ष के दो धुर प्रतिद्वंदियों के रहते एक नये प्रत्याशी के रूप में चुनाव पूर्व ही पहचान बनाना कम बड़ी बात नहीं है । अभी चुनाव शुरु भी नहीं हुए हैँ और प्रशांत किशोर का नाम कौन नहीं जानता ! इस नजरिए से देखें तो प्रशांत किशोर चुनाव पूर्व ही बाजी जीत चुके हैँ । भले चुनाव का परिणाम कुछ भी हो । इसके बाद बाकी सब आकड़ों की बातें हैँ ।

इनको जो भी वोट प्राप्त होंगे, उसमे युवा, महिला और कामगार श्रमिक वर्ग की संख्या अधिक होगी ।

तथा अच्छे प्रदर्शन, संख्या और सीट मिलने का स्थान नदी, वन, पुरातत्त्व प्रधान स्थान होगा ।

अगर इनके प्रभाव से मुख्य दोनो अलाायंस को कम सीट आई तो प्रशांत किशोर सरकार को बाहर् से समर्थन दे सकते हैँ । अपनी शर्तों पर ! प्रशांत किशोर आनेवाले समय में किंगमेकर की भूमिका निभाएं तो भी कोई आश्चर्य नहीं !

भविष्य क्या है भविष्य बताएगा !


Tuesday, September 9, 2025

मेलापक रोमांच

 रोमांचक तथ्य 

वर- वधू मेलापक में कुल 36 में से 28 से अधिक गुण मिलान होने पर उनमें नाड़ी दोष नहीं होता है !

( क्यूंकि कुल गुण 36 होते हैँ और नाड़ी मिलान के अंक 8)


अबकि बार फिर नितीश कुमार शपथ-ग्रहण

कर शपथ कर शपथ कर शपथ शपथ - ग्रहण 20.11.2025 11.37 सुबह,पटना लग्नेश/ग्रह-नक्षत्र-उपनक्षत्र : उपनक्षत्र का नक्षत्र लग्न मकर : शनि-चंद्र-शुक्र ...