Total Pageviews

Thursday, December 19, 2024

भारत और जम्मू-कश्मीर

  भारत की आजादी के समय में भारत के जन्म से पहले पाकिस्तान का जन्म हुआ जबकि भूखंड एक ही था । भारत की आजादी के साथ अभिन्न जम्मू-कश्मीर उस अखंड भूखंड का हिस्सा भारत को मिला जो भारत गुलाम भारत से आजाद भारत के रूप में साथ आजाद हुआ । अपितु जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक दस्तावेज व स्वतंत्रता आदि का काल 27 अक्टूबर 1947 है । यद्यपि राजा हरिसिंह ने 26 तारीख को दस्तखत कर दिए थे फिर भी यह 27 तारीख से प्रभावी (इफेक्टेड) हुआ था । इस प्रकार दोनो तिथि की  महत्ता है । आरंभिक तिथि चंूकि 8 मूलांक है इसलिए यह भारत के फेवर में है जबकि इसका इफेक्टेड होना 9 मूलांक है इसलिए इस सत्ता को लेकर शासकीय समस्या बनी रहेगी ।

  भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसकी राशि कर्क है जबकि जम्मू-कश्मीर का जन्म कर्क लग्न और मीन राशि में हुआ है । कर्क लग्न चूँकि भारत का तृतीय भाव है अतः भारत की भूमि का व्यय स्थान होने के कारण भूमि का यह क्षेत्र बनाम भूखंड भारत के लिए आरंभ से ही परेशानियों का सबब बना है । इसके अतिरिक्त भारत का जन्म मूलांक 6 है जबकि कश्मीर का जन्म मूलांक 9 है जो कि दोनो परस्पर एक-दूसरे के शत्रु हैं । इसके अलावे भारत का संविधान सह गणतंत्र दिवस 26 जनवरी होने के कारण मूलांक 8 है यह भी कश्मीर के जन्म मूलांक का शत्रु है अपितु दोनो अंकों में परस्पर शत्रुता है । ऐसे में भारत का इस भूखंड को लेकर समस्याग्रस्त होना भौगोलिक, सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक आदि स्तर पर स्पष्ट रूप से स्पष्ट होता है ।

  जम्मू-कश्मीर की जन्मकुंडली में लग्न में मंगल व नि का होना जो कि यूं भी शुभ नहीं माना जाता क्योंकि दोनो ग्रहों में परस्पर सौम्यता नहीं है, उसपर भी नीच के मंगल के साथ त्रुगत नि का होना इसका और भी उग्र व विवादित होना स्पष्ट करता है । कश्मीर की कुंडली कर्क लग्न और मीन राशि की है । लग्नेश चन्द्र मीन राशि में नवम में स्थित हैं यद्यपि भाव में अष्टम में है और चंद्र राशीश वृहस्पति वृश्चिक में पंचम में यद्यपि भाव में चतुर्थ में है । कर्क लग्नस्थ मंगल और नि लग्न व भाव दोनो के अनुसार लग्न में हैं । सूर्य, शुक्र और बुध तुला में हैं जबकि वृहस्पति, केतु वृश्चिक में हैं व राहु वृष में हैं यद्यपि भाव में वृहस्पति, केतु चतुर्थ और राहु दम में हैं । कर्क लग्न में नीच के मंगल और मारकेश नि का परस्पर त्रु ग्रह के रूप में लग्न व भाव लग्न दोनो के अनुसार ही लग्न में होना इसके हमेशा बाधाग्रस्त रहने का सूचक है । मंगल के कारण स्थिति उग्र तथापि नि के कारण रणनीतिक व कूटनीतिक भी होगी । लग्नेश का अष्टम मृत्यु भाव में होना भी इसके लिए शुभ नहीं हैं । शायद यही कारण है कि कश्मीर का एक हिस्सा विखंडित हो पाक के कब्जे में भी है जिसे हम पाक अधिकृत कश्मीर के रूप में जानते हैं ।

No comments:

Post a Comment

अबकि बार फिर नितीश कुमार शपथ-ग्रहण

कर शपथ कर शपथ कर शपथ शपथ - ग्रहण 20.11.2025 11.37 सुबह,पटना लग्नेश/ग्रह-नक्षत्र-उपनक्षत्र : उपनक्षत्र का नक्षत्र लग्न मकर : शनि-चंद्र-शुक्र ...