:: अमित कुमार नयनन ::
भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसकी राशि कर्क है। वृष स्थिर तो कर्क चर राशि है अतः स्थिर व चरात्मक दोनो प्रवृति का इसकी प्रवृति व प्रकृति में समावेश होगा । वृष व कर्क दोनो ही राशियां स्वभाव से मृदु हैं अतः इस देश की प्रकृति मृदु व स्नेहशील होगी व इसमे सहनशीलता व विवेकशीलता अन्य देशों की अपेक्षा अधिक रहेगी । लग्नेश शुक्र का राशीश चन्द्र के साथ तृतीय भाव में युति इसके दीर्घकालिक अवस्था को सबलता से दर्शाता है । लग्न में लग्नेश शुक्र मित्र राहु अपनी उच्च राशि में बैठा है । इस प्रकार लग्न के लिए यह एक अच्छी स्थिति है । लग्नेश का तृतीय पराक्रम स्थान में सूर्य, चन्द्र, बुध, शनि के साथ बैठना व केतु से देखा जाना इस देश के विविध लोगो व सभ्यता व संस्कृति के दर्शन को सरल तरीके से इंगित करता है । तृतीय में विविध प्रकृति के पंचग्रह की युति कुछ हद तक संत या एकाकी योग को भी बताता है । इसमे भी संदेह नहीं कि भारत धर्म और आध्यात्म का धनी देश है । इस प्रकार इसकी विविधता में एकता का बल लक्षित होता है जो कि पूर्णतया सही है । भारत भौगोलिक रूप से तीन दिशाओं पूर्व, पश्चिम, दक्षिण दिशा की ओर जल से घिरा प्रायद्वीप है जिसके एकमात्र उत्तर में विशालकाय हिमालय व भूखंड आदि हैं।
भारत की कुंडली में तृतीय पराक्रम स्थान जितना प्रबल है उतना ही चतुर्थ जनता, अचल संपति व भूमि स्थान कमजोर है । तृतीय स्थान में जो ग्रह बल, पराक्रम आदि की वृद्धि कर रहे हैं वही ग्रह जनता, अचल संपति व भूमि के लिए बाधा भी दे रहे हैं क्योंकि तृतीय स्थान चतुर्थ स्थान का व्यय स्थान है। यह युति चूँकि कर्क राशि में बन रही है अतः उतर दिशा भारत के लिए इस मामले में सदा चिंता का मसला रहेगा । तृतीय स्थान में पंचग्रह युति जहां बल व पराक्रम के लिए अच्छी है वहीं यह अचल संपति व भूखंड के लिए बिल्कुल सही नहीं है। इसी कारण तृतीयस्थ शनि महादशा में पाक व चीन युद्ध हुआ व तिब्बत एवं कैलाश व मानसरोवर जैसे भूखंड इस वक्त चीन के कब्जे में हैं । अतः कुल 9 महादशा ग्रहों में इन पांच ग्रहों की दशा में सीमा विवाद अक्सर बना रहेगा । कुल 120 साल की महादशा में सनि 19 साल, बुध 17 साल, शुक्र 20 साल, सूर्य 6 साल व चन्द्र 10 साल आते हैं जो कि 82 साल अर्थात कुल दशा का दो-तिहाई से भी ज्यादा साल आते हैं अतः संक्षेप में भारत को अपने दशाकाल में अक्सर सीमा व भूमि विवाद बना रहेगा और इन पांच ग्रहों की दशा में यह विशेष होगा ।
भारत की आजादी के समय ज्योतिषीयों के द्वारा आजादी का निर्धारित किया गया समय पूर्ण शुभ न होने के कारण आज यह स्थिति है । यही पंचग्रह यदि लग्न, दशम या एकादश में होते तो देश की स्थिति कुछ और होती । फिर भी बल व पराक्रम का स्थान मजबूत होने के कारण यह एक मजबूत देश है और रहेगा ।
भारत की जन्मकुंडली में वर्तमान चन्द्र महादशा फल
चन्द्र महादशा: 21 मई 2015 से 21मई 2025 तक चल रही चन्द्र महादशा में चन्द्र महादशा की चन्द्र अंर्तदशा 21 मई 2016 तक व्यतीत हो चुकी है। इसके उपरांत चन्द्र महादशा में मंगल अंर्तदशा से लेकर चन्द्र महादशा में अन्य समस्त अंर्तदशा का फल निम्न उल्लेखित है । चन्द्र महादशा की 10 साल की महादशा पूर्णता के पश्चात 21 मई 2025 से 7 साल की मंगल महादशा 21 मई 2032 तक चलेगी ।।
चन्द्र महादशा बनाम अंतर्दशा फल :ः भारत की जन्मकुंडली में इस वक्त चन्द्र की महादशा चल रही है । यह स्वबल, पराक्रम, संचार की दशा है मगर साथ ही भूमि के लिए व्ययषील होने के कारण भूविवाद की उलझनें बनी रहेंगी । इसके साथ यह मानसिक कार्य, नेवी व स्त्रीशक्ति के लिए विशेष लाभ लेकर आएगी । वर्तमान में चन्द्र महादशा में मंगल की अंतर्दशा 21 मई 2016 से 21 दिसंबर 2016 तक चल रही है, मंगल द्वितीय भाव में व्ययेश होकर बैठा है अतः अनपेक्षित रूप से विदेशी, एन आर आई, परदेस से सहयोग व आर्थिक लाभ अपेक्षित है। संतति भाव पर मंगल की दृष्टि खेल मुख्य रूप से आक्रामक खेलों के नजरिए से शुभ है । यद्यपि मंगल मारकत्व प्रभाव से भी देख रहा है अतः खेल या फिल्म जगत की विशेष हस्ती का वियोग आदि अपेक्षित है । मंगल सप्तम का स्वामी होने के कारण साझेदारी, आयात निर्यात, इंटरनेषनल व्यापार आदि में प्रसार दे रहा है । मंगल का प्रभाव 21 दिसंबर 2016 तक है । तत् चन्द्र महादशा में राहु की अंतर्दशा आरंभ हो जाएगी जो कि 21 दिसंबर 2016 से 21 जून 2018 तक जारी रहेगी। राहु लग्न में उच्च का हो तृतीयस्थ शुक्र का फल भी दे रहा है । इस प्रकार यह संचार व्यवस्था के लिए अतिशुभ है । परिवहन, कूरीयर, टेलिमीडिया, मीडिया जैसे क्षेत्रों मे विशेष विकास होगा । फिल्म जगत के लिए भी यह एक शुभ व सुखद दौर है । इस प्रकार 18 माह की यह अंतर्दशा अपने शुभ प्रभाव के साथ जारी रहेगी । तत् 16 माह की वृहस्पति अंतर्दशा का दौर 21 जून 2018 से 21 अक्टूबर 2019 तक मिश्रित है । एक ओर तो यह आर्थिक लाभ करा रहा है मगर साथ ही साझेदार या साझेदारी या अन्यत्र समस्या भी दे रहा है । इसे मिश्रित कहा जा सकता है । तत् 19 माह के शनि अंतर्दशा का दौर21 अक्टूबर 2019 से 21 मई 2021 तक होगा । यह भूविवाद, आतंकवाद आदि मुद्दों का समय है । यह देश मे उथल पुथल को भी दर्शा रहा है । यद्यपि समस्याओं का अंततः समाधान होगा मगर विशेषत: उतर-पश्चिम, पूर्वोतर भारत व विदेशी क्षेत्र में भारत को सावधान रहना होगा । सीमा विवाद के मामले में भारत को पूर्ण रूप से सतर्क रहने की जरूरत है । तत 17 माह की बुध अंतर्दशा 21 मई 2021 से 21 अक्टूबर 2022 तक व्यापारिक संदर्भ की अतिशुभ दशा है । इस दरम्यान बैकींग सेक्टर, स्टाॅक मार्केट, मनी मैटरर्स, आर्थिक क्षेत्र में मुख्यतः प्रसार होगा । तत् 7 माह की केतु अंतर्दशा 21अक्टूबर 2022 से 21 मई 2023 तक मिश्रित आक्रामक तेवर के साथ आएगी । अच्छा व बुरा दौर आकस्मिक प्रभाव के साथ होगा । आकस्मिक उठापटक व अप्रत्याशित घटनाक्रम का समय है । तत् 20 माह की षुक्र अंतर्दशा 21 मई 2023 से 21 जनवरी 2025 तक कला, सिनेमाई, मीडिया, संचार, परिवहन आदि के लिए सुफल लेकर आएगा । यह दौर मुख्यतः लव, रोमांस, स्त्री संबंधी सम मनोरंजक फिल्मों का होगा, एक्शन का कम प्रभाव होगा, ऐसी फिल्में ज्यादा प्रसार व उपलब्धि अर्जित करेंगी व भारतीय सिनेमा को समृद्ध करेंगी । तत् 6 माह की सूर्य अंतर्दशा 21 जनवरी 2025 से 21 जुलाई 2025 भूविवाद के साथ स्वबल व पराक्रम की दशा भी होगी । यह एक राजनैतिक विकलता व सफलता का दौर होगा । इसी के साथ तत् चन्द्र महादशा की 10 साल की महादशा की अवधि पूर्णता उपरांत 7 साल की मंगल महादशा का आरंभ होगा ।।
भारत व गोचर
भरत के भारत से आर्यावर्त से इंडिया तक का प्राचीन से नवीन युग तक इस प्रायद्वीपीय भूमि पर बहुत कुछ बदला है । भारत की प्राचीन राशि मकर व वर्तमान राशि कर्क मानी जाती है । मकर राशि के अनुसार एकादश शनि गोचर शुभ हैं जबकि कर्क राशि के अनुसार पंचम शनि समस्याएं पैदा कर रहे हैं । यह समस्याएं जनता, जनसंख्या, फिल्म, खेल, मनोरंजन आदि के लिए है। वर्तमान भारत के लिए वर्तमान कर्क राशि को देखना उपयुक्त रहेगा अपितु दीर्घकालिक बातों के लिए मकर राषि के अनुसार गणना उचित होगी। मकर से अष्टम वृह. साल के पूर्वार्ध में बाधाकारक व तत भाग्य वृधि का फल बता रहे हैं जबकि कर्क से द्वितीय वृह. साल के पृर्वाध में आर्थिक सफलता, मित्र देशों की वृधि जैसे फल दे रहे हैं तत से परिवहन, संचार, प्रसार आदि के क्षेत्र में शुभ फल दे रहे हैं। इस प्रकार गोचर अवस्था शुभ है ।।
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