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Wednesday, May 28, 2025

सुभाषचंद्रबोस


महान आत्माएँ सदा अमर होती हैं मगर भौतिक शरीर का आना-जाना तो लगा रहता है। महान अमर स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्रबोस भी कुछ-कुछ ऐसे ही थे।


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महान अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाषचंद्र बोस का जन्म मेष लग्न कन्या राशि में हुआ था ।

कुंडली मे 1, 2, 3, 7, 8 से आयु की गणना की जाती है; 1, 3, 8 भाव आयु तथा 2, 7 मारकेश को सूचित करते हैं !

महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्रबोस की कुंडली के 8वें भाव में वृश्चिक राशि है और वृश्चिक राशि में शनि स्थित हैं।

प्रथमतः तो यह कि शनि शनै: गति के कारण दीर्घकारक ग्रह हैं, इसलिए किसी भी वस्तु का विस्तार, लम्बाई, लम्बी अवधि के लिए अति कारक नैसर्गिक ग्रह हैं; इसलिए लम्बी आयु के लिए शुभ हैं।

सभी जानते हैं कि ज्योतिष में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कुंडली में सबसे अशुभ स्थान 8 भाव होते हैं और संबंधित ग्रह विशेष स्थिति में होने पर ही शुभ फल देते हैं। 8 भाव में तो कोई भी ग्रह शुभ फल नहीं देता है, यहां तक ​​कि शनि भी बाधाएं देते हैं, मगर लंबी उम्र भी देते हैं। क्योंकि यह विलंबकारक विस्तारवादी दीर्घकारक दीर्घकालिक ग्रह हैँ। इसलिए यह कहा जा सकता है कि स्वभाविक रूप से जब तक विशेष दृष्टि आदि न बनी हो तो अन्य सभी ग्रहों की अपेक्षा शनि 8 भाव में सबसे अधिक शुभ फल देने वाले ग्रह हैँ।

8 में शनि के होने का कारण आयु और मृत्यु से संबंधित बातें रहस्यमय, गुप्त, अज्ञात होती हैं या हो सकती हैं; शनि मृत्यु के बारे में अपूर्णता, संदेह पैदा करते हैं। क्योंकि शनि रहस्य, गुप्त, अज्ञात को सूचित करते हैं।

कुंडली में 8 भाव में 8 राशि वृश्चिक है जिसका स्वामी मंगल हैं और 8 राशि बनाम वृश्चिक राशि शनि की शत्रु राशि है; शनि 10 कर्म और 11 लाभ स्वामी 8 में हैं मंगल युद्ध के प्रतिनिधि ग्रह हैं जबकी शनि अजनबी को कहते हैं, साथ ही कुंडली में 8 और 12 भाव अजनबी और विदेश का है। इसलिए महान सुभाषचंद्रबोस युद्ध के कारण अजनबी लोग, नवीन परिवेश, विदेश से जुड़े और इन कारणों के साथ उनकी मृत्यु के कारण आज तक अज्ञात हैं। भारत सरकार की टॉप सीक्रेट फाइल में ऐसा क्या है; मौत से जुड़ी बातें हैं! यदि ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो हाँ !


अगर ज्योतिष के नजरिए से देखा जाए तो महान अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाषचंद्र की जन्मकुंडली में शनि लम्बी आयु दे रहे हैं और 1945 में वो युवा थे और जिस दिन उनकी एरोप्लेन दुर्घटना में मृत्यु कही जाती है उस तारीख 18 अगस्त 1945 को शनि मिथुन में विराजमान थे; सो दशा, नक्षत्र, गोचर आदि से मृत्यु सूचित नहीं हो रहे हैं। इसलिए इतना तो निश्चित है कि 1945 में मृत्यु नहीं हुई थी। अमर स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु तब हुई जब 16 सितम्बर 1985 को शनि 8 भाव 8 राशि मंगल की राशि वृश्चिक में गोचर कर रहे थे बल्कि उसी दिन उनका उस राशि में प्रवेश हुआ था तथा उस दिन चन्द्रमा उनकी जन्म-राशि कन्या में थे अर्थात उनकी जन्म-राशि उदित थी; ज्ञात हो कि कुंडली मे चन्द्रमा जिस राशि में होते हैँ वही उसकी जन्म-राशि होती है।

संभावना यही है कि वो गुमनामी बाबा ही सुभाषचंद्रबोस थे,जो अयोध्या के देहाती इलाके में फ़ैजाबाद में 16 सितम्बर 1985 को गुमनामी की मौत मर गए। कहा जाता है कि उस दिन भारतीय सेना के कुछ लोग भी और आज़ाद हिंद फ़ौज के भी कुछ लोग उनकी चिता पर आए थे। उस दिन आकाश ने भी पानी की बूंदों से उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजली दी थी। महान लोगो की आत्मा का स्वागत उपरवाला भी इस प्रकार भी करते हैँ, सुख और दुख के आँसू एकसाथ गिरते हैँ - भौतिक शरीर की मृत्यु हो गई यह दुख हुआ मगर अच्छे लोगो की जरूरत ऊपर भी तो होती है' तो उनके स्वागत में खुशी के आँसू भी साथ बहते हैँ; एक ही आँसू में सुख और दुख के दोनो उदगार के साथ महान आत्माओं का दोनो जग मे स्वागत होता है! 🙏🏻

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