महान स्वतंत्रता सेनानी में आजादी के बाद कुछ भाग्यशाली लोग ही हुए जिन्होंने गुलाम देश से आजाद देश में कदम रखा और आजाद देश के लोकप्रिय नेता भी बने। इस मामले में महान स्वतंत्रता सेनानी लाल बहादुर शास्त्री एकमात्र वह भाग्यशाली स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने पंडित नेहरू के अलावे सत्ता के सिंहासन पर काबिज हुए और प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया। हालांकि प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान ही उनकी अकाल रहस्यात्मक मृत्यु हो गई जो आजतक संदेह के घेरे में है। मगर उन चंद दिनों में उन्होंने जो कमाल किया वो आज भी बेमिसाल है' क्योंकि वो स्वयं बेमिसाल थे।
कुंडली 1 & 2 :
1
02.10.1904 11:40 AM variants
2
09.10.1904 11:20 AM VARANASI
भारत के लाल लाल बहादुर शास्त्री की कुंडली को लेकर मत विभिन्नता है । आमतौर पर उनका जन्म 2 अक्तुबर् 1904 को माना और मनाया जाता है मगर असल में उनकी वास्तविक जन्मतिथि 9 अक्तुबर् 1904 को है । यद्यपि हम दोनो प्रकार के चार्ट से अध्ययन करेंगे तब भी कोई अधिक फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, क्यूंकि चंद्र, बुध के अलावे तमाम ग्रह और लग्न की स्थिति लगभग समान है। इनका जन्म समय 2 अक्तुबर् 1904 को 11.40 दिन या 9 अक्तुबर् को 11.20 दिन में वाराणसी में माना जाता है।दोनो प्रकार से इनका धनु लग्न लक्षित होता है। 2 से 9 तारीख तक में चन्द्रमा, बुध के अतिरिक्त किसी भी ग्रह ने राशि-परिवर्तन नहीं किया है इसलिए और इस प्रकार चन्द्रमा, बुध के अलावे सभी ग्रहों की अवस्था और स्थिति दोनो तारीखों में समान रहने के कारण तथा दोनो कुंडली के लग्न समान होने से कुंडली की स्थिति लगभग पूर्ववत समान रहती है।
: कुंडली विश्लेषण :
लाल बहादुर शास्त्री के मृत्यु भाव को शनि देख रहे हैँ, शनि का मृत्यु भाव से सम्पर्क संदेह, रहस्य वगैरह पैदा करता है। शनि मुख, फ़ूड भाव के स्वामी होकर अपनी राशि में बैठकर मृत्यु भाव को देख रहे हैँ, इससे उनके खाने में जहर दिये जाने का संकेत मिल रहा है। चंद्रमा का दशम में सूर्य, बुध के साथ बैठना इस षडयंत्र की अधिक सूचना देता है। यद्यपि यह 9 अक्तुबर् की कुंडली अनुसार है। जो की उनकी प्रचलित जन्म-तिथि नहीं है। मगर यह इसलिए प्रचलन में है क्यूंकि शायद यही सत्य है। कई बार कई कारण से मूल जन्म-तिथि और सर्टिफिकेट अथवा प्रचलित जन्म-तिथि में अंतर होता है। मगर ज्योतिष गणना के लिए मूल जन्म तिथि की जन्म-कुंडली ही चाहिए। इस मामले में कमोबेश इतना तो है कि मूल और प्रचलित जन्म-तिथि और जन्म-कुंडली में अधिक का अंतर नहीं है । इसलिए गणना और तुलनात्मक अध्ययन दोनो संभव है। इसलिए गणना में तो दोनो लगभग बहुत मामलो में समान हैँ मगर तुलनात्मक अध्ययन करने पर दूध का दूध पानी का पानी हो जाता है। प्रचलित तिथि के मुकाबले कम प्रचलित तिथि कुंडली को और घटनाओं को अधिक स्पष्ट करती है।
कुंडली में मृत्यु भाव के स्वामी का सप्तम, नवम, दशम के स्वामी के साथ बैठना व्यवसायिक अथवा कार्य हेतु की गई दूरस्थ यात्रा में सुदूर मृत्यु की सूचना देता है। उच्च के बुध का इसमे होना एक सशक्त माध्यम के द्वारा इस कार्य को मूर्त रूप देता है। मुख भाव से स्वराशि शनि की मृत्यु भाव पर संदेह पैदा करते भोजन में जहर का भी संकेत देता है। शनि दास प्रकृति ग्रह हैँ अतः दास रसोइया के द्वारा जहर देना इसको और भी सूक्ष्मता से स्पष्ट करता है।
दशम भाव में बैठे तीनों ग्रह सूर्य, चन्द्रमा, बुद्ध में सूर्य, चन्द्रमा स्वाभाविक रूप से राजसी ग्रह हैँ तो बुध स्वराशि में बैठकर विश्व-प्रसिद्ध पंच महापुरुष योग में से एक योग रूचक योग बना रहे हैँ। सूर्य, चंद्र, बुध की युति अति उच्च पद के साथ अति उच्च राजनीतिक षडयंत्र का इशारा करती है! क्यूंकि इसमे मृत्यु स्थान के मालिक चन्द्रमा भी साथ हैँ। हालांकि एक प्रमुख ज्योतिष नियम के अनुसार मृत्यु भाव के स्वामी यदि सूर्य या चंद्र हों तो उन्हें इसका दोष नहीं लगता, मगर चुंकि चन्द्रमा यहां अस्त हैँ इसलिए कारकत्व नहीं तो स्थिति के हिसाब से तो चन्द्रमा का अस्त होना समस्या अवश्य ही पैदा करता है। दशम भाव राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मसलों का भी है, इसलिए इस मामले में इनका भी हस्तक्षेप परीलक्षित होता है।
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