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Friday, May 30, 2025

लाल बहादुर शास्त्री : एक जीवंत रहस्य-कथा


महान स्वतंत्रता सेनानी में आजादी के बाद कुछ भाग्यशाली लोग ही हुए जिन्होंने गुलाम देश से आजाद देश में कदम रखा और आजाद देश के लोकप्रिय नेता भी बने। इस मामले में महान स्वतंत्रता सेनानी लाल बहादुर शास्त्री एकमात्र वह भाग्यशाली स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने पंडित नेहरू के अलावे सत्ता के सिंहासन पर काबिज हुए और प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया। हालांकि प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान ही उनकी अकाल रहस्यात्मक मृत्यु हो गई जो आजतक संदेह के घेरे में है। मगर उन चंद दिनों में उन्होंने जो कमाल किया वो आज भी बेमिसाल है' क्योंकि वो स्वयं बेमिसाल थे।


कुंडली  1 & 2 :


  1


02.10.1904 11:40 AM variants




  2


09.10.1904 11:20 AM VARANASI



भारत के लाल लाल बहादुर शास्त्री की कुंडली को लेकर मत विभिन्नता है । आमतौर पर उनका जन्म 2 अक्तुबर् 1904 को माना और मनाया जाता है मगर असल में उनकी वास्तविक जन्मतिथि 9 अक्तुबर् 1904 को है । यद्यपि हम दोनो प्रकार के चार्ट से अध्ययन करेंगे तब भी कोई अधिक फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, क्यूंकि चंद्र, बुध के अलावे तमाम ग्रह और लग्न की स्थिति लगभग समान है। इनका जन्म समय 2 अक्तुबर् 1904 को 11.40 दिन या 9 अक्तुबर् को 11.20 दिन में वाराणसी में माना जाता है।दोनो प्रकार से इनका धनु लग्न लक्षित होता है। 2 से 9 तारीख तक में चन्द्रमा, बुध के अतिरिक्त किसी भी ग्रह ने राशि-परिवर्तन नहीं किया है इसलिए और इस प्रकार चन्द्रमा, बुध के अलावे सभी ग्रहों की अवस्था और स्थिति दोनो तारीखों में समान रहने के कारण तथा दोनो कुंडली के लग्न समान होने से कुंडली की स्थिति लगभग पूर्ववत समान रहती है।


: कुंडली विश्लेषण :


लाल बहादुर शास्त्री के मृत्यु भाव को शनि देख रहे हैँ, शनि का मृत्यु भाव से सम्पर्क संदेह, रहस्य वगैरह पैदा करता है। शनि मुख, फ़ूड भाव के स्वामी होकर अपनी राशि में बैठकर मृत्यु भाव को देख रहे हैँ, इससे उनके खाने में जहर दिये जाने का संकेत मिल रहा है। चंद्रमा का दशम में सूर्य, बुध के साथ बैठना इस षडयंत्र की अधिक सूचना देता है। यद्यपि यह 9 अक्तुबर् की कुंडली अनुसार है। जो की उनकी प्रचलित जन्म-तिथि नहीं है। मगर यह इसलिए प्रचलन में है क्यूंकि शायद यही सत्य है। कई बार कई कारण से मूल जन्म-तिथि और सर्टिफिकेट अथवा प्रचलित जन्म-तिथि में अंतर होता है। मगर ज्योतिष गणना के लिए मूल जन्म तिथि की जन्म-कुंडली ही चाहिए। इस मामले में कमोबेश इतना तो है कि मूल और प्रचलित जन्म-तिथि और जन्म-कुंडली में अधिक का अंतर नहीं है । इसलिए गणना और तुलनात्मक अध्ययन दोनो संभव है। इसलिए गणना में तो दोनो लगभग बहुत मामलो में समान हैँ मगर तुलनात्मक अध्ययन करने पर दूध का दूध पानी का पानी हो जाता है। प्रचलित तिथि के मुकाबले कम प्रचलित तिथि कुंडली को और घटनाओं को अधिक स्पष्ट करती है।



कुंडली में मृत्यु भाव के स्वामी का सप्तम, नवम, दशम के स्वामी के साथ बैठना व्यवसायिक अथवा कार्य हेतु की गई दूरस्थ यात्रा में सुदूर मृत्यु की सूचना देता है। उच्च के बुध का इसमे होना एक सशक्त माध्यम के द्वारा इस कार्य को मूर्त रूप देता है। मुख भाव से स्वराशि शनि की मृत्यु भाव पर संदेह पैदा करते भोजन में जहर का भी संकेत देता है। शनि दास प्रकृति ग्रह हैँ अतः दास रसोइया के द्वारा जहर देना इसको और भी सूक्ष्मता से स्पष्ट करता है।

दशम भाव में बैठे तीनों ग्रह सूर्य, चन्द्रमा, बुद्ध में सूर्य, चन्द्रमा स्वाभाविक रूप से राजसी ग्रह हैँ तो बुध स्वराशि में बैठकर विश्व-प्रसिद्ध पंच महापुरुष योग में से एक योग रूचक योग बना रहे हैँ। सूर्य, चंद्र, बुध की युति अति उच्च पद के साथ अति उच्च राजनीतिक षडयंत्र का इशारा करती है! क्यूंकि इसमे मृत्यु स्थान के मालिक चन्द्रमा भी साथ हैँ। हालांकि एक प्रमुख ज्योतिष नियम के अनुसार मृत्यु भाव के स्वामी यदि सूर्य या चंद्र हों तो उन्हें इसका दोष नहीं लगता, मगर चुंकि चन्द्रमा यहां अस्त हैँ इसलिए कारकत्व नहीं तो स्थिति के हिसाब से तो चन्द्रमा का अस्त होना समस्या अवश्य ही पैदा करता है। दशम भाव राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मसलों का भी है, इसलिए इस मामले में इनका भी हस्तक्षेप परीलक्षित होता है।

सच आज भी भारत की टॉप सीक्रेट फाइल में गुप्त है - वह भी जाने पूरा सच है या अधूरा सच!



Wednesday, May 28, 2025

सुभाषचंद्रबोस


महान आत्माएँ सदा अमर होती हैं मगर भौतिक शरीर का आना-जाना तो लगा रहता है। महान अमर स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्रबोस भी कुछ-कुछ ऐसे ही थे।


23:01:1897 12:15:41 PM कटक

महान अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाषचंद्र बोस का जन्म मेष लग्न कन्या राशि में हुआ था ।

कुंडली मे 1, 2, 3, 7, 8 से आयु की गणना की जाती है; 1, 3, 8 भाव आयु तथा 2, 7 मारकेश को सूचित करते हैं !

महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्रबोस की कुंडली के 8वें भाव में वृश्चिक राशि है और वृश्चिक राशि में शनि स्थित हैं।

प्रथमतः तो यह कि शनि शनै: गति के कारण दीर्घकारक ग्रह हैं, इसलिए किसी भी वस्तु का विस्तार, लम्बाई, लम्बी अवधि के लिए अति कारक नैसर्गिक ग्रह हैं; इसलिए लम्बी आयु के लिए शुभ हैं।

सभी जानते हैं कि ज्योतिष में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कुंडली में सबसे अशुभ स्थान 8 भाव होते हैं और संबंधित ग्रह विशेष स्थिति में होने पर ही शुभ फल देते हैं। 8 भाव में तो कोई भी ग्रह शुभ फल नहीं देता है, यहां तक ​​कि शनि भी बाधाएं देते हैं, मगर लंबी उम्र भी देते हैं। क्योंकि यह विलंबकारक विस्तारवादी दीर्घकारक दीर्घकालिक ग्रह हैँ। इसलिए यह कहा जा सकता है कि स्वभाविक रूप से जब तक विशेष दृष्टि आदि न बनी हो तो अन्य सभी ग्रहों की अपेक्षा शनि 8 भाव में सबसे अधिक शुभ फल देने वाले ग्रह हैँ।

8 में शनि के होने का कारण आयु और मृत्यु से संबंधित बातें रहस्यमय, गुप्त, अज्ञात होती हैं या हो सकती हैं; शनि मृत्यु के बारे में अपूर्णता, संदेह पैदा करते हैं। क्योंकि शनि रहस्य, गुप्त, अज्ञात को सूचित करते हैं।

कुंडली में 8 भाव में 8 राशि वृश्चिक है जिसका स्वामी मंगल हैं और 8 राशि बनाम वृश्चिक राशि शनि की शत्रु राशि है; शनि 10 कर्म और 11 लाभ स्वामी 8 में हैं मंगल युद्ध के प्रतिनिधि ग्रह हैं जबकी शनि अजनबी को कहते हैं, साथ ही कुंडली में 8 और 12 भाव अजनबी और विदेश का है। इसलिए महान सुभाषचंद्रबोस युद्ध के कारण अजनबी लोग, नवीन परिवेश, विदेश से जुड़े और इन कारणों के साथ उनकी मृत्यु के कारण आज तक अज्ञात हैं। भारत सरकार की टॉप सीक्रेट फाइल में ऐसा क्या है; मौत से जुड़ी बातें हैं! यदि ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो हाँ !


अगर ज्योतिष के नजरिए से देखा जाए तो महान अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाषचंद्र की जन्मकुंडली में शनि लम्बी आयु दे रहे हैं और 1945 में वो युवा थे और जिस दिन उनकी एरोप्लेन दुर्घटना में मृत्यु कही जाती है उस तारीख 18 अगस्त 1945 को शनि मिथुन में विराजमान थे; सो दशा, नक्षत्र, गोचर आदि से मृत्यु सूचित नहीं हो रहे हैं। इसलिए इतना तो निश्चित है कि 1945 में मृत्यु नहीं हुई थी। अमर स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु तब हुई जब 16 सितम्बर 1985 को शनि 8 भाव 8 राशि मंगल की राशि वृश्चिक में गोचर कर रहे थे बल्कि उसी दिन उनका उस राशि में प्रवेश हुआ था तथा उस दिन चन्द्रमा उनकी जन्म-राशि कन्या में थे अर्थात उनकी जन्म-राशि उदित थी; ज्ञात हो कि कुंडली मे चन्द्रमा जिस राशि में होते हैँ वही उसकी जन्म-राशि होती है।

संभावना यही है कि वो गुमनामी बाबा ही सुभाषचंद्रबोस थे,जो अयोध्या के देहाती इलाके में फ़ैजाबाद में 16 सितम्बर 1985 को गुमनामी की मौत मर गए। कहा जाता है कि उस दिन भारतीय सेना के कुछ लोग भी और आज़ाद हिंद फ़ौज के भी कुछ लोग उनकी चिता पर आए थे। उस दिन आकाश ने भी पानी की बूंदों से उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजली दी थी। महान लोगो की आत्मा का स्वागत उपरवाला भी इस प्रकार भी करते हैँ, सुख और दुख के आँसू एकसाथ गिरते हैँ - भौतिक शरीर की मृत्यु हो गई यह दुख हुआ मगर अच्छे लोगो की जरूरत ऊपर भी तो होती है' तो उनके स्वागत में खुशी के आँसू भी साथ बहते हैँ; एक ही आँसू में सुख और दुख के दोनो उदगार के साथ महान आत्माओं का दोनो जग मे स्वागत होता है! 🙏🏻

अबकि बार फिर नितीश कुमार शपथ-ग्रहण

कर शपथ कर शपथ कर शपथ शपथ - ग्रहण 20.11.2025 11.37 सुबह,पटना लग्नेश/ग्रह-नक्षत्र-उपनक्षत्र : उपनक्षत्र का नक्षत्र लग्न मकर : शनि-चंद्र-शुक्र ...