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Sunday, October 26, 2025

बिहार : वर्तमान सरकार का भविष्य

अमित कुमार नयनन 

[ एक सटीक विश्लेषण ]

इस पूर्व विश्लेषण की विशेषता यह है कि नितीश कुमार ने जब 26.११.२०१० में शपथ-ग्रहण किया था ही नितीशजी के स्वेच्छा से पद छोड़ पद पर किसी और को आसीन करने की भविष्यवाणी की गई थी । उस वक़्त लोग जीतनराम मांझी का नाम तक लोग ठीक से नहीं जानते थे । इसमे उनके आसीन होने का ज्योतिषीय कारण के साथ स्पष्ट भविष्यकथन किया गया था ।

शपथ-ग्रहण की यह कुंडली ना सिर्फ ज्योतिष प्रेमियों के लिए एक सटीक उदाहरण है बल्कि साथ ही यह भी बताता है कि  शपथ-ग्रहण के आधार पर निर्मित कुंडली भी भविष्यगणना में कितनी अधिक कारगर होती है ।


बिहार : वर्तमान सरकार का भविष्य 

[ "टाइप्ड वर्शन" ]

मुख्यमंत्री नितीश कुमार का शपथ ग्रहण मेष लग्न ( स्वामी मंगल ) अश्विनी नक्षत्र ( स्वामी केतु ) में हुआ । राशि के हिसाब से कर्क राशि के पुष्य नक्षत्र में इस सरकार का जन्म हुआ, जो कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शुभ मुहूर्त है । लग्न के हिसाब से लग्नेश का अष्टम में होना बहुत शुभ नहीं होता, मगर स्वगृही  होने से वह अपनी दुसरी राशि अर्थात् लग्न को अपने स्थान से दुगुना फल प्रदान करते हैं । इस आधार पर सरकार की विपरीत स्थितियों में स्थायित्व को सूचित करती है ।

शुभ पक्ष :- 

* चन्द्रमा चतुर्थ स्थान अर्थात् जनता भाव मे स्वगृही हैं अर्थात यह जनता के लिए विशेषकर महिलाओं के लिए विशेष शुभ होगी । चतुर्थ में किसी पाप या अशुभ ग्रह की दृष्टि नहीं है । इस कारण यह जनप्रिय सरकार सिद्ध होगी । चन्द्रमा ( राजसी ) पुष्य ( शनि : सेवक ) नक्षत्र में होना इसे सभी प्रकार की जनता व बुद्धिजीवियों का समर्थन व सहयोग दिलाएगा । महिला इस सरकार की प्रबल समर्थक होंगी ।

* सप्तम में ( साझेदारी का भाव ) स्वगृही शुक्र अपने द्वितीयेश राशि की दुगुनी ताक़त से वृद्धि कर रहा है । सप्तम (साझेदारी ) और द्वितीय ( मित्र ) भाव इस सरकार को भरोसेमंद मित्र और सहयोगी एवं साझेदार देते हैं जो सरकार को स्थिर रखने में कारक भूमिका निभाते हैं । 

अशुभ पक्ष :- 

* पंचमेश का अष्टम में होना उपयुक्त उत्तराधिकारी के न होने का सूचक है, अथवा ऐसा भी हो सकता है कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व अधिकारी पर खतरा आ जाए, दाग लग जाए अथवा उसके साथ अशुभ घटित हो । अष्टम ( मृत्यु ) में सूर्य, मंगल, बुद्ध का संयोग सरकार की किसी विशेष मसले पर किरकिरी कराने में समर्थ है । षष्ठेश बुद्ध अष्टम में सूर्य, मंगल के साथ संयुक्त हैं । षष्ठ एक्सीडेंट, अष्टम मृत्यु व पंचम उत्तराधिकारी का संयोग किसी दुखद कांड या आकस्मिक बाधा की सूचना देता है । या फिर ऐसा भी हो सकता है कि किसी शीर्ष अधिकारी की दुर्घटना या किसी अन्यान्य कारण से मौत हो जाए अथवा उसके स्थान पर हटने के कारण किसी दूसरे का उस स्थान पर आगमन हो ।

दशाफल :-

शनि की महादशा :- शनि षष्ठ में चन्द्रमा के नक्षत्र व केतु के उपनक्षत्र में हैं । इस तरह उनका चतुर्थ और नवम से सीधा सम्पर्क है । दशम, एकादश का स्वामी होने के नाते शनि को शुभत्व में अतिरिक्त बल प्राप्त है । शनि षष्ठ में आर्थिक मामलों में सफलता व बढ़ते साझेदारों व फाइनेन्सरो की सूचना देते हैं । जनता व भाग्य का सहयोग चतुर्थ, नवम से स्पष्ट लक्षित है । केतु बुद्ध के कारक हो, जो कि अस्टमस्थ हैं, के कारण नवम के साथ अष्टम का फल देते हैं व कुछ आकस्मिक बाधाओं की सूचना देते हैं । इस प्रकार अधिकतम शुभ व आकस्मिक बाधा दोनो लक्षित है ।

* आत्मकारक वृह. ( एकादश ) और अमात्यकारक बुद्ध ( अष्टम ) एक-दूसरे से केंद्रवत हैं । अमात्यकारक बुद्ध का अष्टम ( मृत्यु ) भाव में होना ( अमात्य ) अर्थात मंत्रीमंडल में विघटन व फेरबदल करवाता है । इस प्रकार इस सरकार के मंत्रीमंडल मे फेरबदल के काफी हद तक संकेत हैं । 

सारांश : एक जनप्रिय सरकार जिसके मंत्रीमंडल में फेरबदल होगी मगर साझेदारी में ब्रेक अप की स्थति नहीं है । अतः यह एक सुशासन सरकार सिद्ध होगी ।


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